पश्चिम बंगाल में गांवों के स्तर पर रोजगार गारंटी से जुड़ी परियोजनाओं की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य में 125 दिनों के सुनिश्चित ग्रामीण काम से जुड़ी व्यवस्था के क्रियान्वयन में सुस्ती और फील्ड स्तर पर सामने आ रही ढिलाई को देखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा सत्र बुलाया है. इस विचार-विमर्श में राज्यभर के सभी ब्लॉक विकास अधिकारी सीधे शामिल होंगे, ताकि जिलों और ब्लॉकों में चल रहे कार्यों का सही लेखा-जोखा सामने आ सके.
जमीनी स्तर पर रुकावटों की होगी पड़ताल
प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पंचायत स्तर से लेकर अलग-अलग जिलों में इस कल्याणकारी योजना के संचालन को लेकर लगातार शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजी जा रही थीं. इन पत्रों और ज्ञापनों में अधिकारियों की सुस्ती के साथ-साथ कामों के रुकने का हवाला दिया गया था. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे जमीनी अमले से जवाब मांगने का रास्ता चुना है. बैठक के दौरान हर ब्लॉक में शुरू की गई पहलों का ब्योरा परखा जाएगा और यह जाना जाएगा कि योजना के क्रियान्वयन में कौन सी व्यावहारिक बाधाएं आ रही हैं.
साल्ट लेक स्थित मुख्यालय में जुटेगा पूरा अमला
यह अहम बैठक बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसके लिए कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके साल्ट लेक में स्थित पश्चिम बंगाल पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास विभाग के मुख्यालय को चुना गया है. प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार, इस मंथन में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष और राज्य मंत्री शांतनु प्रमाणिक भी मौजूद रहेंगे. नेतृत्व सीधे तौर पर बीडीओ से यह समझना चाहता है कि कुछ खास इलाकों में काम की गति कमजोर क्यों बनी हुई है और स्थानीय स्तर पर किन प्रशासनिक चूकों की वजह से योजना पिछड़ रही है.
शीर्ष नौकरशाहों के मंथन के बाद उठाया गया कदम
फील्ड अधिकारियों के साथ यह सीधी बातचीत अचानक नहीं हो रही है, बल्कि इससे ठीक पहले एक उच्चस्तरीय समीक्षा पूरी की जा चुकी है. पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ने विभिन्न महकमों के सचिवों, प्रधान सचिवों और अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ एक मैराथन बैठक की थी. उस चर्चा में भी कई विकास खंडों के अंदर योजनाओं में हो रही देरी का मसला प्रमुखता से रेखांकित हुआ था. सचिवालय के एक अधिकारी के अनुसार, उस बैठक के बाद ही यह तय हुआ कि केवल सचिवालय के भीतर निर्देश जारी करने से बात नहीं बनेगी और ब्लॉक स्तर के प्रभारियों से आमने-सामने संवाद जरूरी है. शीर्ष स्तर से अधिकारियों को साफ संदेश दिया जा चुका है कि ग्रामीण आजीविका से जुड़े इस बड़े कार्यक्रम में किसी भी तरह की लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा.
100 की जगह 125 दिन के काम का नया ढांचा
विधानसभा चुनाव के उपरांत सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की ओर से तैयार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जीआरएएम-जी व्यवस्था को जमीन पर उतारा गया था. इस नए ढांचे के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए काम की गारंटी को पुरानी 100 दिनों की सीमा से बढ़ाकर सालाना 125 दिन कर दिया गया था. यह संशोधित व्यवस्था राज्य में एक जुलाई 2026 से प्रभावी बनाई गई थी. हालांकि नई प्रणाली के औपचारिक रूप से लागू होने के महीनों बाद भी अपेक्षित प्रगति न मिलने से मुख्यमंत्री कार्यालय असंतुष्ट दिखा है. सरकार की मंशा इस बैठक के जरिए प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को तेज गति देने की है.



















