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विधानसभा में कैग रिपोर्ट: भारी कर्ज और वित्तीय घाटे से जूझा हिमाचल प्रदेश, विकास कार्यों के बजट पर पड़ा असरहिमाचल प्रदेश
4 सित॰ 2026, 1:00 pm (18 दिन पहले)· 2

विधानसभा में कैग रिपोर्ट: भारी कर्ज और वित्तीय घाटे से जूझा हिमाचल प्रदेश, विकास कार्यों के बजट पर पड़ा असर

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में राज्य के बढ़ते कर्ज और राजकोषीय घाटे पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। राजस्व का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी में चले जाने के कारण विकास योजनाओं के लिए पूंजीगत खर्च घट गया है।

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर भारी दबाव नजर आ रहा है, जहाँ लगातार बढ़ते कर्ज और बजटीय घाटे ने राज्य के खजाने की स्थिति को चिंताजनक बना दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बृहस्पतिवार को विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्धारित सीमाओं से अधिक घाटा होने के कारण राज्य सरकार के पास बुनियादी विकास और बुनियादी ढांचे पर खर्च करने के लिए काफी कम राशि बची है।

एफआरबीएम सीमा से बाहर निकला घाटा

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून के अंतर्गत तय किए गए लक्ष्यों का पालन करने में असमर्थ रही। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.94 प्रतिशत है। इसी प्रकार, राजकोषीय घाटा बढ़कर 12,611.05 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो जीएसडीपी का 5.44 प्रतिशत बैठता है।

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वेतन, पेंशन और सब्सिडी का भारी बोझ

राज्य के कुल राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा नियमित देनदारियों में ही खर्च हो रहा है, जिससे नए निर्माण कार्यों के लिए बजट नहीं बच पा रहा। कुल राजस्व प्राप्तियों का 86 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और उपदान के भुगतान में चला गया। इसमें से 70 प्रतिशत रकम तो केवल अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशन पर ही खर्च हुई। इसके अतिरिक्त, बिजली सब्सिडी और कर्ज राहत से जुड़े कदमों के कारण सब्सिडी मद में किया जाने वाला खर्च भी काफी बढ़ गया।

केंद्रीय अनुदान पर निर्भरता और जीडीपी में घटती हिस्सेदारी

यद्यपि राज्य के गैर-कर राजस्व में 22.40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और जीएसटी तथा केंद्रीय करों में हिमाचल की हिस्सेदारी 4.34 प्रतिशत बढ़ी, फिर भी राज्य की निर्भरता केंद्रीय अनुदानों पर बहुत अधिक बनी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 9.20 प्रतिशत रही थी। हालांकि, देश की कुल जीडीपी में हिमाचल प्रदेश का योगदान 0.70 प्रतिशत ही रहा। पिछले 5 वर्षों के दौरान राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य की हिस्सेदारी में गिरावट आई है, जिसे रिपोर्ट में ध्यान देने योग्य विषय माना गया है।

1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल कर्ज

हिमाचल प्रदेश पर कुल बकाया कर्ज का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर निकल चुका है। इस विशाल कर्ज और उच्च घाटे के चलते सरकार के पास पूंजीगत व्यय यानी बुनियादी विकास योजनाओं के लिए सीमित बजटीय गुंजाइश ही शेष रह गई है।

सवाल-जवाब

हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय और राजस्व घाटा कितना दर्ज किया गया है?
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य का राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 5.44%) और राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 2.94%) रहा।
राज्य के राजस्व का कितना प्रतिशत वेतन और पेंशन में खर्च होता है?
राज्य के कुल राजस्व का 70 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन और पेंशन पर खर्च किया जाता है, जबकि वेतन, पेंशन और उपदान मिलाकर यह आंकड़ा 86 प्रतिशत हो जाता है।
हिमाचल प्रदेश पर कुल कितना कर्ज है?
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
भारत की कुल जीडीपी में हिमाचल प्रदेश का योगदान कितना है?
भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिमाचल प्रदेश का योगदान 0.70 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
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