जयपुर में आयोजित डायमंड स्टेट समिट में राजस्थान की वर्तमान वित्तीय स्थिति, ढांचागत सुधारों, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक निवेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विमर्श हुआ। इस अवसर पर राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने प्रदेश के विकास मॉडल और पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि केंद्र और राज्य में एक ही विचारधारा की सरकार होने का प्रत्यक्ष लाभ राजस्थान की जनता को मिला है। डबल इंजन मॉडल के माध्यम से राज्य के प्रशासनिक और वित्तीय संतुलन को नया बल मिला है, जिससे विकास की अटकी हुई योजनाओं को दोबारा तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है।
जल संकट के स्थाई समाधान के लिए ईआरसीपी और यमुना समझौते की पहल
राजस्थान में जल आपूर्ति ऐतिहासिक रूप से एक अत्यंत संवेदनशील और प्राथमिक चुनौती रही है। अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि राज्य में कृषि गतिविधियों के साथ-साथ आम नागरिकों की दैनिक घरेलू जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना शासन का सबसे बड़ा दायित्व है। इस दिशा में पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना यानी ईआरसीपी की रूपरेखा तैयार की गई थी। हालांकि, बाद में शासन में परिवर्तन आने के बाद यह महत्वाकांक्षी योजना राजनीतिक गतिरोध और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ठप पड़ गई थी। वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के उपरांत इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पुनर्जीवित किया गया है और इसे जमीनी स्तर पर लागू करने का काम त्वरित गति से चल रहा है। इसके अतिरिक्त, पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करके यमुना के पानी को राजस्थान तक लाने के मार्ग में आ रही विधिक और तकनीकी बाधाओं को दूर कर लिया गया है, जिससे प्रदेश के सूखाग्रस्त इलाकों के लिए पानी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और 26 जिलों में अनवरत बिजली आपूर्ति
राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका को केंद्रीय बताते हुए अरुण चतुर्वेदी ने बिजली उत्पादन क्षमताओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में बिजली की किल्लत और अघोषित कटौती से आम जनता और उद्योगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता था। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने नए बिजली उत्पादन संयंत्रों की कार्यप्रणाली में सुधार किया और उत्पादन क्षमता को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाया। इसके परिणामस्वरूप आज राजस्थान के 26 जिलों में बिना किसी रुकावट के दिन-रात बिजली की आपूर्ति की जा रही है। 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलने से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सिंचाई के लिए किसानों को समय पर पानी मिल पा रहा है, बल्कि शहरी इलाकों में छोटे-बड़े उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को भी बिजली संकट से पूर्ण राहत मिली है।
राइजिंग राजस्थान और नए वित्तीय प्रयोगों से निवेश को बढ़ावा
राज्य के खजाने को मजबूत बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए वित्त आयोग तथा राज्य सरकार द्वारा कई अभिनव प्रयोग किए गए हैं। अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि केवल पारंपरिक कर संरचना पर निर्भर रहने के बजाय सरकार ने नए संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की नीति अपनाई है। इसी रणनीति के तहत राइजिंग राजस्थान जैसी व्यापक निवेश पहल की शुरुआत की गई है। इस वैश्विक मंच के जरिए देश और विदेश के बड़े निवेशकों को राजस्थान की ओर आकर्षित किया जा रहा है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे के कारण प्रदेश में विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और सेवा क्षेत्रों में भारी पूंजी निवेश आने की संभावनाएं बनी हैं। इस निवेश चक्र से न केवल राज्य की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
युवा आंदोलनों, जनरेशन जी और विपक्ष पर तीखा हमला
कार्यक्रम के दौरान जनरेशन जी युवाओं और जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों के सवाल पर अरुण चतुर्वेदी ने अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि देश के युवाओं में असीम ऊर्जा है और उनकी सोच राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि वहां कुछ भटके हुए युवा एकत्र हुए थे। चतुर्वेदी के अनुसार, वह किसी बुनियादी जनहित के मुद्दे पर आधारित वास्तविक आंदोलन नहीं था, बल्कि महज आंदोलन खड़ा करने के उद्देश्य से की गई एक निरर्थक कवायद थी। इसके साथ ही, उन्होंने एसआईआर मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता को लगातार भ्रमित करने का प्रयास कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं की छवि को धूमिल करके देश में अराजकता का माहौल पैदा करने में लगी हुई है।



















