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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में पटरियों की मरम्मत पूरी, उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच ट्रेन सेवा बहाल करने की तैयारीभारत
5 सित॰ 2026, 2:50 pm (8 घंटे पहले)· 2

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में पटरियों की मरम्मत पूरी, उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच ट्रेन सेवा बहाल करने की तैयारी

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में न्यू फरक्का लाइन पर क्षतिग्रस्त पटरियों को ठीक कर लिया गया है, जिसके बाद शनिवार सुबह ट्रायल रन शुरू हो गया। अधिकारियों को उम्मीद है कि शनिवार शाम तक उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच रेल परिचालन पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में न्यू फरक्का लाइन पर रेलवे पटरियों को दुरुस्त करने का काम शनिवार सुबह पूरी तरह संपन्न हो गया है। पटरियों की मरम्मत का काम खत्म होते ही रेलवे की प्राधिकृत टीमों ने सुरक्षा परीक्षण और ट्रायल रन की प्रक्रिया शुरू कर दी। दक्षिण बंगाल को उत्तर बंगाल से जोड़ने वाले इस बेहद महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर पिछले कुछ दिनों से ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ी हुई थी।

भूस्खलन और लगातार बारिश से बढ़ा था संकट

न्यू फरक्का रेल लाइन पर हुए अचानक भूस्खलन के कारण पटरियों को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क टूट गया था। रेल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को ही आपातकालीन स्तर पर मरम्मत का काम शुरू करा दिया था। हालांकि, क्षेत्र में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण काम में बड़ी रुकावटें आईं। मरम्मत स्थल पर मिट्टी पूरी तरह जलमग्न और बेहद अस्थिर हो गई थी, जिससे भारी मशीनों और कर्मचारियों को काम करने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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शुक्रवार रात को बारिश रुकने और मौसम में सुधार होने के बाद राहत कार्य की गति में तेजी लाई गई। रात भर चले अथक प्रयासों के बाद शनिवार सुबह तक पटरियों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया।

शनिवार शाम तक ट्रेन सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पटरियों का काम पूरा होने के बाद शनिवार सुबह सफल ट्रायल रन किया गया। पटरियों की सुरक्षा जांच पूरी होने के साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि शनिवार शाम तक इस मुख्य मार्ग पर सामान्य ट्रेन परिचालन फिर से शुरू कर दिया जाएगा। इस घोषणा से पिछले कई दिनों से यात्रा के लिए परेशान हो रहे हजारों यात्रियों ने राहत की सांस ली है।

रेल मार्ग बाधित रहने के कारण उत्तर और दक्षिण बंगाल को जोड़ने वाली कई प्रमुख ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था, जबकि अनेक गाड़ियों को बदले हुए रूटों से चलाया जा रहा था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूर्ण सुरक्षा परीक्षण और पटरियों की मजबूती सुनिश्चित करने के बाद ही यात्री गाड़ियों को सामान्य गति से चलाने की अनुमति दी गई है।

रेलकर्मियों ने मनाया जश्न और बस किरायों में उछाल

दिन-रात चौबीसों घंटे बिना रुके काम करने वाले रेलवे अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों ने परीक्षण रन की सफलता पर गहरी राहत जताई। गुरुवार से लगातार विषम परिस्थितियों में डटे कर्मचारियों ने काम पूरा होने पर 'भारत माता की जय' के नारे लगाकर अपनी सफलता का जश्न मनाया।

दूसरी ओर, ट्रेनों के बंद रहने का असर सड़क परिवहन पर भी देखने को मिला। कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच चलने वाली निजी बसों की मांग में भारी बढ़ोतरी हो गई। इस मजबूरी का फायदा उठाते हुए निजी बस संचालकों ने सामान्य दिनों में 1,500 रुपये रहने वाले बस किराए को बढ़ाकर 5,000 से 6,000 रुपये तक वसूलना शुरू कर दिया था, जिससे यात्रियों को भारी आर्थिक चपत लगी। अब ट्रेन सेवाएं बहाल होने से यात्रियों को इस भारी बस किराए से भी मुक्ति मिलेगी।

सवाल-जवाब

न्यू फरक्का लाइन पर ट्रेन सेवाएं क्यों बाधित हुई थीं?
न्यू फरक्का लाइन पर रेलवे पटरियों पर भूस्खलन होने और लगातार बारिश के कारण पटरियों को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे रेल सेवाएं रोकनी पड़ी थीं।
मरम्मत का काम कब पूरा हुआ और परीक्षण कब शुरू हुआ?
पटरियों की मरम्मत का काम शनिवार सुबह पूरा कर लिया गया और इसके तुरंत बाद रेलवे अधिकारियों ने ट्रायल रन शुरू कर दिया।
दक्षिण और उत्तर बंगाल के बीच सामान्य ट्रेन सेवाएं कब तक शुरू होंगी?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, शनिवार शाम तक इस रूट पर सामान्य ट्रेन परिचालन फिर से शुरू होने की संभावना है।
ट्रेनें बंद रहने के दौरान बस किरायों पर क्या असर पड़ा था?
ट्रेन सेवाएं बंद होने से कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच निजी बस किराया 1,500 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये से 6,000 रुपये तक पहुंच गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·6 घंटे पहले

मुर्शिदाबाद में रेल पटरियों की यह मरम्मत दर्शाती है कि आपदा प्रबंधन में तकनीकी तेजी कितनी जरूरी है। हालांकि, संकट के समय निजी बस ऑपरेटरों द्वारा किराए में चार गुना तक की बढ़ोतरी (5,000 से 6,000 रुपये तक) करना गंभीर नियामक विफलता को उजागर करता है। भविष्य में ऐसे प्राकृतिक व्यवधानों के दौरान मूल्य नियंत्रण और वैकल्पिक परिवहन के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि यात्रियों का आर्थिक शोषण रोका जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 घंटे पहले

संकट की इस स्थिति में निजी बस संचालकों द्वारा सामान्य किराए को पांच से छह गुना तक बढ़ा देना केवल मुनाफाखोरी नहीं, बल्कि आपदा के वक्त यात्रियों की लाचारी का गंभीर आर्थिक शोषण है। कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी के मोर्चे पर यह एक स्पष्ट चूक है, क्योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आपदा के समय मुनाफाखोरी रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। भविष्य में ऐसे संकटों के दौरान जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को ऐसी मनमानी रोकने के लिए सख्त मूल्य नियंत्रण और आपातकालीन विनियामक तंत्र लागू करना होगा ताकि आम जनता को इस प्रकार की लूट से बचाया जा सके।

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