निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को लेकर बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक से आम आदमी पार्टी ने पूरी तरह किनारा कर लिया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को इस रुख की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि उनका संगठन अब विपक्षी गुट का घटक नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाए जाने वाले महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में उनकी पार्टी मजबूती से खड़ी है और संस्थागत कमियों को जनता के बीच ले जा रही है।
विपक्षी मंच से दूरी और स्वतंत्र विरोध की रणनीति
संजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि साझा बैठकों में हाजिरी लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता, क्योंकि उनकी पार्टी पहले ही इस गठबंधन से नाता तोड़ चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 18 जुलाई, 2025 को आम आदमी पार्टी ने इस समूह से औपचारिक अलगाव का ऐलान कर दिया था। उस समय भी नेतृत्व ने रेखांकित किया था कि विपक्षी समन्वय केवल 2024 के आम चुनावों तक सीमित उद्देश्य के लिए गठित हुआ था। ऐसे में अब साझा मंच साझा किए बिना ही पार्टी अपने स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठाना जारी रखेगी।
राजधानी में विपक्षी दिग्गजों का शक्ति प्रदर्शन
दूसरी तरफ राजधानी में विपक्षी मोर्चे के प्रमुख नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर गहन मंथन किया। इस संयुक्त रणनीति सत्र में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल तथा जयराम रमेश मौजूद रहे। उनके अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी चर्चा में शरीक हुईं।
बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रतिनिधियों के अलावा दोनों प्रमुख वाम दलों, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने भी आगामी संयुक्त विरोध की रूपरेखा तैयार करने में हिस्सा लिया।
मतदाता सूची पुनरीक्षण और प्रक्रियागत देरी पर तीखे सवाल
गठबंधन से अलग होने के बावजूद संजय सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि केवल पश्चिम बंगाल के भीतर 27 लाख लोगों के मताधिकार छिन गए हैं। न्यायिक ट्रिब्यूनल के समक्ष चल रही लंबी कानूनी प्रक्रियाओं की गति पर रोष जताते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा रफ्तार से पूरी कवायद समाप्त होने में करीब 12 साल का लंबा वक्त लग सकता है।
आप नेता के मुताबिक अब तक निस्तारित किए गए 1.26 लाख मामलों की पड़ताल से पता चला है कि 93 फीसदी लोग मतदान के पूरी तरह पात्र थे। उन्होंने व्यापक स्तर पर मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मामले को अत्यंत चिंताजनक बताया और दावा किया कि समूचे देश के पैमाने पर लगभग 13.37 करोड़ मतदाताओं के नाम चुनावी सूचियों से हटाए जा चुके हैं।














