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यमुना एक्सप्रेसवे पर पुलिस की पिस्टल छीनकर भाग रहा 118 मामलों का आरोपी वसीम अकरम एनकाउंटर में ढेर होने से बचा, पैर में लगी गोलीभारत
13 अग॰ 2026, 10:37 pm (30 दिन पहले)· 1

यमुना एक्सप्रेसवे पर पुलिस की पिस्टल छीनकर भाग रहा 118 मामलों का आरोपी वसीम अकरम एनकाउंटर में ढेर होने से बचा, पैर में लगी गोली

दिल्ली पुलिस कस्टडी से फरार होने की कोशिश के दौरान मोस्ट वांटेड बदमाश वसीम अकरम उर्फ लम्बू मथुरा में पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया, जिसमें एक सब इंस्पेक्टर भी घायल हुए हैं।

दिल्ली पुलिस की उत्तर-पश्चिम जिला टीम द्वारा पश्चिम बंगाल से ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाए जा रहे 118 आपराधिक मामलों के आरोपी वसीम अकरम उर्फ लम्बू की मथुरा के पास पुलिस के साथ भीषण मुठभेड़ हो गई। यमुना एक्सप्रेसवे पर कस्टडी से भागने के इरादे से वसीम ने एक पुलिसकर्मी की 9 एमएम सर्विस पिस्टल छीन ली और पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित हमले में सब इंस्पेक्टर अजय कुमार के बाएं हाथ में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस टीम की तरफ से आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में वसीम के दाएं पैर में घुटने के ठीक नीचे गोली लगी, जिससे वह मौके पर गिर पड़ा और उसे दोबारा पुलिस कस्टडी में ले लिया गया।

यमुना एक्सप्रेसवे पर शौचालय का बहाना बनाकर रची भागने की साजिश

पुलिस से प्राप्त विवरण के अनुसार, 11 और 12 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि लगभग 12 बजे पश्चिम बंगाल की अदालत से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्पेशल स्टाफ की टीम वसीम अकरम को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान आरोपी वसीम लगातार शारीरिक अस्वस्थता का हवाला देते हुए शौचालय जाने की जिद कर रहा था। उसकी गतिविधि और मांग को देखते हुए पुलिस टीम ने यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते में सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए कई बार वाहन रोका था।

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जब पुलिस का वाहन यमुना एक्सप्रेसवे के मथुरा क्षेत्र में पहुंचा, तब आरोपी ने एक बार फिर शौचालय जाने का अनुरोध किया। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए वाहन को सड़क के बाईं तरफ सुरक्षित रूप से रोका गया। वाहन से वसीम को बाहर निकालने की जिम्मेदारी सब इंस्पेक्टर अजय कुमार, हेड कांस्टेबल हरीश, हेड कांस्टेबल जोगेंद्र, हेड कांस्टेबल सत्य नरेंद्र और हेड कांस्टेबल नरसी राम की टीम पर थी।

सर्विस पिस्टल छीनकर फायरिंग और पुलिस की जवाबी कार्रवाई

जैसे ही वसीम को वाहन से नीचे उतारा गया, उसने अचानक हेड कांस्टेबल हरीश के पास मौजूद 9 एमएम की सरकारी सर्विस पिस्टल झपट ली और तेजी से भागने की कोशिश की। वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उसे तुरंत रुकने और हथियार सौंपने की कड़ी चेतावनी दी, लेकिन वह लगातार भागता रहा। भागते समय वसीम ने छीनी गई सर्विस पिस्टल से पीछा कर रही पुलिस टीम पर गोली चला दी।

इस गोलीबारी में एक गोली सब इंस्पेक्टर अजय कुमार के बाएं हाथ में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने संयम बरतते हुए आरोपी को दोबारा आत्मसमर्पण करने को कहा। आरोपी वसीम ने सरेंडर करने के बजाय पुलिसकर्मियों पर दोबारा निशाना साधते हुए फायरिंग की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हेड कांस्टेबल नरसी राम और टीम के अन्य सदस्यों ने आत्मरक्षा में नियंत्रित जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली वसीम के दाएं पैर के निचले हिस्से में लगी और वह वहीं ढेर होकर गिर पड़ा।

जहांगीरपुरी में 20 वर्षीय इरफान की नृशंस हत्या का मुख्य आरोपी

उत्तर-पश्चिम दिल्ली की डीसीपी आकांक्षा यादव के अनुसार, वसीम अकरम की तलाश जहांगीरपुरी में हुए एक चर्चित हत्याकांड के सिलसिले में की जा रही थी। यह वारदात 18 जुलाई 2026 की शाम को करीब 8 बजे जहांगीरपुरी के बी और सी मार्केट रोड के पास घटी थी। वहां करीब 15 से 20 लोगों का एक समूह, जिसमें 5 से 6 महिलाएं भी शामिल थीं, 20 साल के युवक इरफान पर चाकुओं से जानलेवा हमला कर रहा था।

घटना के समय गश्त पर तैनात हेड कांस्टेबल कृष्ण कुमार यादव और सोहन लाल तुरंत मौके पर पहुंचे और इरफान को बचाने का प्रयास किया। मुख्य आरोपी वसीम अकरम उर्फ लम्बू और उसके साथियों ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला बोल दिया। आरोपियों ने पुलिसकर्मियों को घेरकर चाकुओं से हमला किया और उन्हें जबरन पास के एक मकान में बंद कर दिया। पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद आरोपियों ने इरफान पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार जारी रखे। जब आसपास भीड़ जुटने लगी, तो वसीम के निर्देश पर सभी हमलावर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल इरफान को तुरंत बाबू जगजीवन राम अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में वेश बदलकर पुलिस ने किया गिरफ्तार

इरफान हत्याकांड के बाद से ही वसीम अकरम लगातार अपने ठिकाने बदलकर दिल्ली पुलिस को चकमा दे रहा था। वह जहांगीरपुरी थाने का घोषित बैड कैरेक्टर था और उस पर पूर्व से ही 118 एफआईआर दर्ज थीं। उत्तर-पश्चिम जिले की स्पेशल स्टाफ टीम उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी।

तकनीकी जांच और इनपुट के आधार पर पुलिस को सूचना मिली कि वसीम पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम इलाके में नाम बदलकर छिपा हुआ है। स्पेशल स्टाफ की एक विशेष टीम तुरंत पश्चिम बंगाल भेजी गई। पुलिस अधिकारियों ने नंदीग्राम में कई दिनों तक वेश बदलकर उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद टीम ने वसीम को वहां धर दबोचा। इसके बाद हल्दिया अदालत में उसे पेश कर ट्रांजिट रिमांड प्राप्त की गई, ताकि उसे 13 अगस्त 2026 तक दिल्ली की रोहिणी अदालत में पेश किया जा सके। लेकिन दिल्ली लाते समय मथुरा में उसने भागने का प्रयास किया और मुठभेड़ में घायल हो गया।

सवाल-जवाब

वसीम अकरम कौन है और उस पर कितने मामले दर्ज हैं?
वसीम अकरम उर्फ लम्बू दिल्ली के जहांगीरपुरी का बैड कैरेक्टर है, जिसके खिलाफ हत्या, लूट और पॉक्सो समेत 118 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर मुठभेड़ कैसे हुई?
ट्रांजिट के दौरान शौचालय जाने के बहाने वसीम ने हेड कांस्टेबल की सर्विस पिस्टल छीनकर फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी।
इरफान हत्याकांड क्या है जिसमें वसीम वांटेड था?
18 जुलाई 2026 को जहांगीरपुरी में वसीम और उसके साथियों ने 20 वर्षीय इरफान की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी।
वसीम अकरम को कहां से गिरफ्तार किया गया था?
दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में वेश बदलकर कई दिनों की निगरानी के बाद उसे गिरफ्तार किया था।
इस मुठभेड़ में कौन सा पुलिसकर्मी घायल हुआ?
वसीम द्वारा छीनी गई पिस्टल से की गई फायरिंग में सब इंस्पेक्टर अजय कुमार के बाएं हाथ में गोली लगी और वे घायल हो गए।
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टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·29 दिन पहले

यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मुठभेड़ नहीं, बल्कि कानून प्रवर्तन कर्मियों के मानसिक दबाव और व्यावसायिक तनाव का गंभीर विषय है। 118 मामलों के आदतन अपराधी को संभालने वाली पुलिस टीम को शारीरिक खतरे के साथ-साथ अत्यधिक मानसिक सतर्कता और त्वरित निर्णय लेने के दबाव से गुजरना पड़ा। ऐसी उच्च जोखिम वाली परिस्थितियों में काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों के लिए मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य सहायता और कार्य-जीवन संतुलन सुनिश्चित करना अब बेहद आवश्यक हो गया है, ताकि वे ऐसे तनावपूर्ण पलों में भी पेशेवर संयम बनाए रख सकें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

वसीम अकरम जैसे 118 मामलों के आदतन अपराधी का ट्रांजिट रिमांड के दौरान पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश करना और हथियार छीनकर गोली चलाना अंतर-राज्यीय पुलिस परिवहन की सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद, अपराधियों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की आंतरिक समीक्षा और एसओपी के कड़ाई से पालन की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की सुरक्षा चूकों और पुलिस कर्मियों की जान जोखिम में पड़ने की घटनाओं को रोका जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

अर्जुन की इस बात को आगे बढ़ाते हुए, 118 आपराधिक मामलों से जुड़े एक कुख्यात आरोपी को एक राज्य से दूसरे राज्य लाने में अपनाए जाने वाले लॉजिस्टिक और रिस्क असेसमेंट प्रोटोकॉल की सख्त ऑडिटिंग की जरूरत है। ऐसे हाई-प्रोफाइल अपराधियों के मामले में केवल पारंपरिक एसओपी पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि डिजिटल सर्विलांस, कड़े शारीरिक प्रतिबंध और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि पुलिसकर्मियों की जान को जोखिम में डाले बिना न्याय प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

118 मामलों के आदतन अपराधी का ट्रांजिट रिमांड के दौरान इस तरह भागने की कोशिश करना पुलिस एस्कॉर्ट प्रोटोकॉल और रूट प्लानिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद इंटर-स्टेट मुजरिमों की लंबी दूरी की आवाजाही में सुरक्षा के मानक और अधिक कड़े किए जाने की आवश्यकता है, ताकि पुलिस बल पर इस तरह के जोखिम कम हों।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

यह घटना न केवल अपराधी के दुस्साहस को दर्शाती है, बल्कि अंतर-राज्यीय परिवहन के दौरान मानक संचालन प्रक्रियाओं के पालन में हुई संभावित चूक की ओर भी इशारा करती है। 118 मामलों में संलिप्त ऐसे शातिर बदमाशों के लिए विशेष रूप से बख्तरबंद वाहनों और मजबूत एस्कॉर्ट्स की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के जोखिमों को टाला जा सके।

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