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यशवंतराव चव्हाण ने डॉ. रामसुभग सिंह को सौंपी थी अपनी 1962 एम्बेसडर, बिहार के भोजपुर में आज भी मौजूद है यह अनूठी धरोहरबिहार
14 अग॰ 2026, 6:47 pm (42 दिन पहले)· 0

यशवंतराव चव्हाण ने डॉ. रामसुभग सिंह को सौंपी थी अपनी 1962 एम्बेसडर, बिहार के भोजपुर में आज भी मौजूद है यह अनूठी धरोहर

वर्ष 1962 में तत्कालीन गृह मंत्री यशवंतराव चव्हाण ने अपने मित्र डॉ. रामसुभग सिंह को अपनी निजी एम्बेसडर कार दे दी थी। भोजपुर में पोते कमल सिंह इस ऐतिहासिक गाड़ी को आज भी सहेज कर रखे हुए हैं।

बिहार के भोजपुर जिले में सहेजी गई 1962 मॉडल की एम्बेसडर कार केवल एक पुरानी गाड़ी नहीं है, बल्कि देश के दो प्रमुख राजनीतिक दिग्गजों के बीच गहरी आत्मीयता का ऐतिहासिक दस्तावेज भी है। यह विंटेज कार पूर्व रेल मंत्री और चार बार के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री डॉ. रामसुभग सिंह तथा देश के पूर्व गृह मंत्री यशवंतराव चव्हाण के बीच की अनूठी राजनीतिक और व्यक्तिगत दोस्ती की गवाही देती है। वर्तमान समय में यह ऐतिहासिक वाहन डॉ. सिंह के परिवार द्वारा एक अनमोल पारिवारिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा गया है, जो उनके जीवनकाल की सादगी और उच्च आदर्शों को दर्शाता है।

जब गृह मंत्री ने दोस्त को दे दी अपनी निजी गाड़ी

कमल सिंह द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार वर्ष 1962 में घटित एक विशेष घटना इस अटूट दोस्ती का प्रतीक बनी। उस समय देश के केंद्रीय गृह मंत्री के पद पर कार्यरत यशवंतराव चव्हाण को जब यह जानकारी मिली कि उनके सहकर्मी डॉ. रामसुभग सिंह के पास अपनी कोई निजी गाड़ी मौजूद नहीं है, तो उन्होंने अपनी निजी कार उन्हें उपहार स्वरूप सौंप दी। बात केवल वाहन देने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि बाद में इसे आधिकारिक और कानूनी रूप से डॉ. रामसुभग सिंह के नाम हस्तांतरित किया गया। यह कदम दोनों वरिष्ठ राजनेताओं के बीच परस्पर सम्मान और आदर भाव की मिसाल बना।

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1958 में शुरू हुआ था एम्बेसडर कार का सफर

भारत के ऑटोमोबाइल परिदृश्य में एम्बेसडर कार का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। देश में एम्बेसडर गाड़ी का व्यावसायिक उत्पादन और आधिकारिक लॉन्च वर्ष 1958 में आरंभ हुआ था। इसके बाद यह वाहन दशकों तक भारतीय सड़कों पर शान, सामाजिक प्रतिष्ठा और सादगी का सबसे बड़ा प्रतीक बना रहा। डॉ. रामसुभग सिंह को वर्ष 1962 में मिली यह पेट्रोल चालित क्लासिक कार उस युग की उत्कृष्ट इंजीनियरिंग और सादगीपूर्ण जीवनशैली का अनूठा संगम थी, जिसे आज भी विंटेज गाड़ियों के शौकीन बड़े चाव से याद करते हैं।

नियमित देखभाल और जीर्णोद्धार की उम्मीद

दशकों का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी यह कार अपनी ऐतिहासिक चमक बनाए हुए है। डॉ. रामसुभग सिंह के पोते कमल सिंह भोजपुर में इस कार की नियमित रूप से देखभाल और साफ-सफाई करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि मामूली तकनीकी मरम्मत और आवश्यक सर्विसिंग के बाद यह एम्बेसडर कार आज भी सड़क पर दौड़ने की स्थिति में आ सकती है। कमल सिंह की प्रबल इच्छा है कि इस बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर का सरकारी या संस्थागत स्तर पर विधिवत जीर्णोद्धार (रेस्टोरेशन) कराया जाए, ताकि आने वाली भावी पीढ़ियां भी भारत के इस राजनीतिक संस्मरण और पारिवारिक विरासत को निकट से देख सकें।

सवाल-जवाब

यह 1962 की एम्बेसडर कार किसके बीच की दोस्ती का प्रतीक है?
यह कार तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री यशवंतराव चव्हाण और पूर्व रेल मंत्री डॉ. रामसुभग सिंह के बीच की गहरी व्यक्तिगत और राजनीतिक दोस्ती का प्रतीक है।
यशवंतराव चव्हाण ने डॉ. रामसुभग सिंह को अपनी कार क्यों सौंपी थी?
1962 में जब यशवंतराव चव्हाण को पता चला कि डॉ. रामसुभग सिंह के पास अपनी कोई निजी गाड़ी नहीं है, तो उन्होंने अपनी कार उन्हें दे दी।
भारत में एम्बेसडर कार का उत्पादन किस वर्ष शुरू हुआ था?
भारत में एम्बेसडर कार का व्यावसायिक उत्पादन और आधिकारिक लॉन्च वर्ष 1958 में शुरू हुआ था।
इस ऐतिहासिक कार को वर्तमान में कहां और किसके द्वारा सहेज कर रखा गया है?
इस कार को बिहार के भोजपुर जिले में डॉ. रामसुभग सिंह के पोते कमल सिंह द्वारा पारिवारिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा गया है।
क्या यह विंटेज एम्बेसडर कार अभी चालू स्थिति में आ सकती है?
कमल सिंह के अनुसार मामूली तकनीकी मरम्मत और सर्विसिंग कराने के बाद यह पेट्रोल चालित कार आज भी चलने की स्थिति में लाई जा सकती है।
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