अयोध्या में वर्ष 1990 में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी की तारीख 30 अक्टूबर को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। सोशल मीडिया मंच X पर एक सार्वजनिक पोस्ट साझा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक घटना को लेकर समाजवादी पार्टी और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के प्रशासन के दौरान रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं, जिसे राज्य के नागरिक कभी माफ नहीं करेंगे।
योगी आदित्यनाथ का बयान और आरोप
योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में 30 अक्टूबर के ऐतिहासिक संदर्भ को रेखांकित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1990 में आज ही के दिन तत्कालीन सपा सरकार ने निहत्थे कारसेवकों पर अंधाधुंध गोलियां चलवाई थीं, जिसे उन्होंने अत्यंत गंभीर कृत्य करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव और उनकी टीम को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की जनता इन पुरानी घटनाओं को भूल चुकी है। उनके मुताबिक, इस घटना का असर इतना गहरा है कि आने वाली तीसरी पीढ़ी तक भी लोग इसे क्षमा नहीं कर सकेंगे।
30 अक्टूबर 1990 का ऐतिहासिक घटनाक्रम
अयोध्या के विवादित परिसर में 30 अक्टूबर 1990 को हजारों की संख्या में कारसेवक एकत्र हुए थे। उस दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस और सुरक्षाबलों ने भीड़ पर फायरिंग की थी। इस गोलीबारी की घटना के बाद सरयू नदी के तट और आसपास के इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। इस पूरे प्रकरण ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के राजनीतिक विमर्श की दिशा हमेशा के लिए बदल दी थी। इस घटना के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच इस मुद्दे पर लगातार राजनीतिक टकराव होता रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस सार्वजनिक बयान के सामने आने के बाद ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं और नागरिकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने पुरानी घटना को याद करते हुए इस बयान का पुरजोर समर्थन किया, वहीं कई अन्य उपयोगकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक विरोधाभास की ओर इशारा किया।




























