रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली से श्रीलंका रवाना हो गए हैं। उन्होंने खुद सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी और बताया कि इस यात्रा के दौरान श्रीलंका के नेतृत्व के साथ सार्थक बातचीत को लेकर वे उत्साहित हैं।
38 साल बाद रक्षा मंत्री का दौरा
खबरों के मुताबिक, यह किसी भारतीय रक्षा मंत्री की 1988 के बाद श्रीलंका की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है, यानी करीब 38 साल बाद यह मौका आया है। इसे महज़ औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर खास जोर दिया जा रहा है। श्रीलंका को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता के लिहाज से अहम माना जाता है, इसलिए रक्षा मंत्री स्तर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग और मजबूत करने की दिशा में देखी जा रही है।
राजनाथ सिंह ने क्या लिखा
अपने पोस्ट में राजनाथ सिंह ने बताया कि वे तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली से श्रीलंका रवाना हो रहे हैं। उन्होंने लिखा कि यात्रा के दौरान श्रीलंका के नेतृत्व के साथ सार्थक और नतीजों वाली बातचीत को लेकर वे उत्साहित हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच पहले से चली आ रही साझेदारी भी इस दौरे का हिस्सा रहेगी।
भारतीय समुदाय से भी होगी मुलाकात
राजनाथ सिंह ने अपने पोस्ट में यह भी साफ किया कि वे श्रीलंका में रह रहे जीवंत भारतीय समुदाय के साथ भी बातचीत करेंगे। तीन दिन के इस दौरे में रक्षा सहयोग के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात इस यात्रा का अहम हिस्सा बताई जा रही है।
भारत-श्रीलंका रिश्तों में नई ऊंचाई
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने कहा कि भारत और श्रीलंका के रिश्ते अभूतपूर्व राजनीतिक और रक्षा जुड़ाव के दौर से गुजर रहे हैं और यह साझेदारी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही कई स्तर पर बातचीत और सहयोग बढ़ा है, जिससे इस दौरे को उसी बढ़ते जुड़ाव की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
राजनाथ सिंह की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने इसे भारत-श्रीलंका संबंधों के लिए ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से अहम कदम बताते हुए समर्थन जताया, तो कुछ ने रक्षा सहयोग के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भारत विरोधी दुष्प्रचार से निपटने को भी प्राथमिकता बनाने की मांग की। वहीं कुछ यूजर्स ने यात्रा को लेकर सवाल भी उठाए और सरकारी खर्च को लेकर टिप्पणियां कीं।


























