डॉ. भीमराव आंबेडकर के स्मारकों और प्रतिमाओं के साथ हो रही तोड़फोड़ को लेकर समाजवादी राजनीति में तीखा आक्रोश देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने एक ऑनलाइन संदेश साझा करते हुए सत्तारूढ़ खेमे की मानसिकता पर सीधा सवाल खड़ा किया है। उनका मानना है कि महापुरुषों की मूर्तियों पर लगातार हो रही दुर्भावनापूर्ण घटनाएं केवल कानून व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि देश की संवैधानिक व्यवस्था के प्रति दुर्भावना का स्पष्ट प्रमाण हैं।
संवैधानिक मूल्यों पर आघात का आरोप
अखिलेश यादव ने X पर लिखा कि बाबासाहेब की मूर्तियों पर हो रहे हमले संविधान के प्रति नफरत का नतीजा हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जो ताकतें संविधान की बुनियादी संरचना और सामाजिक न्याय की अवधारणा को पचा नहीं पा रही हैं, वे ही इस तरह के कृत्यों को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने सत्तापक्ष और उससे जुड़े संगठनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए आरोप लगाया कि इन हरकतों के पीछे लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कमजोर करने की मंशा छिपी है।
कल सामने आएगा ‘पीडीए ऑडिट’ का ब्योरा
इस पूरे मामले को केवल एक औपचारिक बयान तक सीमित न रखते हुए समाजवादी पार्टी एक विस्तृत अभियान शुरू करने जा रही है। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की है कि अगले दिन एक विशेष ‘पीडीए ऑडिट’ प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। इस बैठक में इन तमाम घटनाओं से जुड़े तथ्यात्मक साक्ष्य, जमीनी आंकड़े और पीड़ितों की स्थिति जनता के सामने रखी जाएगी, जिससे व्यवस्था की लापरवाही को उजागर किया जा सके।
जनता की प्रतिक्रिया
इस सियासी बयान के सार्वजनिक होते ही इंटरनेट पर नागरिकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। जहां कई उपयोगकर्ताओं ने पिछड़े और वंचित वर्गों के सम्मान की रक्षा को लेकर अखिलेश के रुख का समर्थन किया, वहीं कुछ लोगों ने स्मारकों की राजनीति पर सवाल उठाते हुए अन्य विभूतियों के योगदान तथा हालिया क्षेत्रीय विवादों का भी जिक्र किया।



























