समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी वाराणसी में बारिश के बाद पैदा हुई जलभराव की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने काशी में ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली और स्मार्ट सिटी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार के उस लंबे समय से चले आ रहे दावे पर तंज कसा जिसमें वाराणसी को जापान के ऐतिहासिक शहर क्योटो की तर्ज पर विकसित करने की बात कही गई थी। अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारी मानसूनी बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख रास्ते और नए निर्माण स्थल जलमग्न नजर आए।
वाराणसी में जलभराव और क्योटो मॉडल पर तंज
अखिलेश यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि देश की 'प्रधान नगरी' में जलमग्न विकास की तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों के सामने उजागर हो गई हैं। उन्होंने तंजिया अंदाज में टिप्पणी की कि जब तक वाराणसी की हालत को बारिश के मौसम में गोरखपुर जैसा नहीं बना दिया जाएगा, तब तक लखनऊ में बैठी सरकार शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था और विकास के दावों का यह विवाद अब केवल दिल्ली बनाम लखनऊ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'क्योटो बनाम स्पेन' की चर्चा बन चुका है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ विज्ञापनों और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों में तरक्की दिखाती है, जबकि धरातल पर बुनियादी सुविधाएं चरमराई हुई हैं।
वाराणसी में बारिश से बेहाल नागरिक सुविधाएं
हाल के दिनों में वाराणसी में हुई मूसलाधार बारिश ने शहर के ड्रेनेज नेटवर्क की पोल खोल दी है। शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे रोप-वे स्टेशन के पास घुटनों से ऊपर तक पानी भर जाने के दृश्य सामने आए, जिससे 'नई काशी' की परिकल्पना पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में काशी में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया था, जिससे यह देश के सबसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल रहा। हालांकि, मानसून के मौसम में पुरानी और सीमित जल निकासी व्यवस्था और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बीच तालमेल न होने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों को जलजमाव, यातायात जाम और गंदगी से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गंगा में अटका विदेशी पर्यटकों का क्रूज
मानसून की बारिश और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने जल परिवहन सेवाओं पर भी बड़ा असर डाला है। विदेशी सैलानियों को लेकर भागलपुर के रास्ते वाराणसी की ओर आ रहा 'राजमहल क्रूज' नदी में आई बाढ़ और अत्यधिक गाद जमा होने की वजह से बीच रास्ते में ही फंस गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सैलानियों की सुरक्षा और मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को मोर्चा संभालना पड़ा। गंगा में जलस्तर के अचानक बढ़ने और नौकायन में आ रही बाधाओं के कारण इस लग्जरी क्रूज को अंततः बिहार के भागलपुर से ही वापस मोड़ना पड़ा। इस घटना ने मानसूनी परिस्थितियों के दौरान जल पर्यटन के प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।
गोरखपुर के बारे में
अखिलेश यादव के बयान में संदर्भित गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख प्रशासनिक, राजनीतिक और व्यापारिक केंद्र है। भौगोलिक सीमा की बात करें तो गोरखपुर जिला पूर्व में देवरिया और कुशीनगर, पश्चिम में संत कबीर नगर, उत्तर में महराजगंज और सिद्धार्थनगर तथा दक्षिण में मऊ, आज़मगढ़ और अम्बेडकर नगर जिलों से घिरा हुआ है। यह शहर पूर्वांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी, चिकित्सा और शिक्षा का मुख्य केंद्र है और राज्य की राजनीति में भी बेहद अहम स्थान रखता है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आम जनता और राजनीतिक समर्थकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बड़ी संख्या में नागरिकों ने शहर की जल निकासी व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग करते हुए विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन किया और कहा कि वैश्विक पहचान रखने वाले शहर में ऐसा जलभराव दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के समर्थकों का तर्क था कि रिकॉर्ड मानसूनी बारिश के कारण सामयिक जलजमाव एक सामान्य प्राकृतिक चुनौती है, और सरकार लगातार बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए काम कर रही है।



























