केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए सिख धर्म के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर समस्त देशवासियों को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। अपने संदेश में उन्होंने इस पावन पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए मानवता के कल्याण और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाले गुरुओं के उपदेशों को याद किया है।
अमृतसर की स्थापना और धार्मिक महत्व
श्री गुरु रामदास जी ने पंजाब के ऐतिहासिक शहर अमृतसर की नींव रखी थी और एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र स्थापित किया जो आज पूरी दुनिया को सेवा, समर्पण और समरसता का मार्ग दिखाता है। उनके द्वारा स्थापित यह पवित्र नगर सिख धर्म की आस्था का महान केंद्र होने के साथ-साथ पूरी मानवता के लिए समानता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक बन चुका है।
अमृतसर के बारे में
अमृतसर, जिसे ऐतिहासिक रूप से रामदासपुर और स्थानीय बोलचाल में अम्बरसर भी कहा जाता है, भारत के पंजाब राज्य का दूसरा सबसे बड़ा नगर है और यह अमृतसर ज़िले का मुख्यालय भी है। राज्य के माझा क्षेत्र में स्थित यह शहर सिख धर्म का सबसे पवित्र नगर है जहाँ विश्वप्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर स्थित है, जिसे इस शहर का हृदय माना जाता है। यह स्थान कभी गुरु रामदास का डेरा हुआ करता था और आज यह एक प्रमुख सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक तथा यातायात केंद्र है। भौगोलिक दृष्टि से यह नगर चंडीगढ़ से 217 किलोमीटर यानी 135 मील पश्चिमोत्तर, नई दिल्ली से 455 किलोमीटर पश्चिमोत्तर, पाकिस्तान के लाहौर से 47 किलोमीटर पूर्वोत्तर और अटारी-वाहगा सीमा से 28 किलोमीटर यानी 17.4 मील की दूरी पर स्थित है।
प्रकाश पर्व पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर और देश भर के अन्य गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस पावन अवसर पर स्वर्ण मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है और देश-विदेश से पहुँची संगत ने मत् टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई जगहों पर स्थानीय छुट्टियों और विशेष आयोजनों के माध्यम से इस पर्व को बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस बधाई संदेश के सामने आने के बाद बड़ी संख्या में नागरिकों और श्रद्धालुओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी तथा गुरु रामदास जी के बताए हुए सेवा और समरसता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।































