भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज़्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य की अपनी दो दिवसीय सफल राजनयिक यात्रा पूरी करने के बाद नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। बिश्केक शहर में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के उपरांत उन्होंने इस पूरी यात्रा को बेहद उत्पादक और सार्थक बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि सम्मेलन के दौरान हुई विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें आने वाले समय में भारत के आर्थिक तथा कूटनीतिक हितों के लिए दूरगामी और ठोस लाभ पहुंचाएंगी।
अगले 25 वर्षों के लिए पेश किया 10 सूत्री रोडमैप
बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान मंच को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ संगठन के साझा विजन को व्यावहारिक रूप देने पर जोर दिया। उन्होंने संगठन के आगामी 25 वर्षों के संचालन और विकास के लिए एक विस्तृत 10 सूत्री कार्य योजना (रोडमैप) का अनावरण किया। इस दूरदर्शी योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना, व्यापारिक गलियारों का विस्तार करना, डिजिटल प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
द्विपक्षीय वार्ताएं और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा
मुख्य सम्मेलन सत्रों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिज़स्तान के नेतृत्व सहित कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन वार्ताओं के दौरान ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण, आतंकवाद विरोधी ठोस रणनीति और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग द्वारा द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने जैसे रणनीतिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन वार्ताओं से मध्य एशिया में भारत की उपस्थिति और प्रभाव दोनों सुदृढ़ होंगे।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस अंतरराष्ट्रीय दौरे को लेकर आम नागरिकों और विश्लेषकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई उपयोगकर्ताओं ने मध्य एशिया के साथ भारत के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की। इसके साथ ही, कुछ अन्य नागरिकों ने सरकार का ध्यान वैश्विक व्यस्तताओं के साथ-साथ देश के आंतरिक और सामाजिक मुद्दों की ओर भी आकर्षित किया।



























