सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए एक विशेष संदेश में नरेंद्र मोदी ने महान समाज सुधारक महात्मा अय्यंकाली की जयंती के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मलयालम भाषा में जारी किए गए इस संदेश के माध्यम से उन्होंने महात्मा अय्यंकाली को सामाजिक न्याय का एक मजबूत वक्ता और अग्रणी प्रतीक बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि किस प्रकार समाज के कमजोर, वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के कल्याण तथा अधिकारों की रक्षा के लिए उनका जीवन हमेशा एक प्रेरणापुंज रहा है।
शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय का संदेश
अपने संदेश में नरेंद्र मोदी ने महात्मा अय्यंकाली के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने वंचित समाज के लिए शिक्षा के रास्ते खोलने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तिकरण का मुख्य स्तंभ मानते हुए उन्होंने उस दौर में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और दाखिले के अधिकारों के लिए कड़ा संघर्ष किया। उनका मानना था कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति शिक्षित और जागरूक नहीं होगा, तब तक वास्तविक सामाजिक न्याय की स्थापना संभव नहीं है। उनके इन प्रयासों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए बराबरी और आत्मसम्मान का मार्ग प्रशस्त किया।
कृषि श्रमिकों के अधिकार और गरीबों का उत्थान
इस संदेश में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार और गरीबों के उत्थान के लिए महात्मा अय्यंकाली द्वारा चलाए गए अभियानों पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। उन्होंने खेत-खलिहानों में पसीना बहाने वाले श्रमिकों के मानवीय अधिकारों, उचित पारिश्रमिक और बेहतर कार्यपरिस्थितियों के लिए निरंतर आवाज उठाई थी। सामाजिक गैर-बराबरी को समाप्त करने और एक समावेशी समाज के निर्माण में उनके विचार आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक और मार्गदर्शक बने हुए हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस श्रद्धांजलि संदेश के जारी होने के बाद आम नागरिकों ने महात्मा अय्यंकाली के महान योगदान को याद करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, जहां अनेक लोगों ने सामाजिक समानता और शिक्षा के प्रसार को रेखांकित किया, वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने नागरिक सुविधाओं और नीतिगत सुधारों से जुड़े समकालीन विषयों पर चर्चा की।



























