साहित्य और कला के मंचों पर अक्सर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने वाले शशि थरूर ने चेट्टीनाड लिट फेस्ट के दौरान बिताए अपने दिन की झलकियां साझा की हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि रविवार का उनका पूरा दिन सांस्कृतिक विमर्श, क्षेत्रीय वास्तुकला की समझ और ऐतिहासिक हथकरघा परंपराओं के अवलोकन में बीता। साहित्यिक उत्सवों में इस प्रकार के सांस्कृतिक सत्र न केवल क्षेत्रीय विरासत को रेखांकित करते हैं, बल्कि कला प्रेमियों को विभिन्न संस्कृतियों के आपसी जुड़ाव को समझने का भी अवसर देते हैं।
वास्तुकला और परंपराओं पर प्रो. बेनी कुरियाकोस का व्याख्यान
कार्यक्रम के मुख्य सत्रों में दक्षिण भारत की स्थापत्य शैली और निर्माण कला पर केंद्रित एक विशेष चर्चा शामिल रही। शशि थरूर के अनुसार, प्रोफेसर बेनी कुरियाकोस द्वारा दक्षिण भारतीय वास्तुकला की परंपराओं और विशिष्ट शैलियों पर दिया गया व्याख्यान बेहद प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक रहा। इस व्याख्यान में दक्षिण भारत के पारंपरिक भवनों, उनकी बनावट और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला गया, जिसने उपस्थित श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
चेट्टीनाड, पेरानाकन और पारसी बुनाई शैलियों का संगम
साहित्यिक सत्रों के साथ-साथ इस आयोजन में एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था। थरूर ने इस क्यूरेटेड प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसमें चेट्टीनाड, पेरानाकन और पारसी परंपराओं की आपस में जुड़ी बुनाई कला को प्रदर्शित किया गया था। वस्त्र कला के इस अनूठे संग्रह ने यह दर्शाया कि किस तरह विभिन्न संस्कृतियां और व्यापारिक संबंध सदियों से एक-दूसरे के ताने-बाने को समृद्ध करते रहे हैं। थरूर ने इस प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे समृद्ध कलात्मक धरोहर का बेहतरीन उदाहरण बताया।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस अपडेट के सामने आने के बाद ऑनलाइन पाठकों ने चेट्टीनाड की समृद्ध विरासत और क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। कई उपयोगकर्ताओं ने भारतीय हथकरघा और पारंपरिक वास्तुकला को मुख्यधारा के मंचों पर उजागर करने के प्रयासों की सराहना की।


























