सार्वजनिक जीवन में संगठन निर्माण और सामाजिक सशक्तीकरण के पुरोधा रहे लक्ष्मणराव इनामदार की जयंती पर अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर संदेश साझा कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संदेश में उन्होंने राष्ट्र की सेवा, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने और सहकारिता तंत्र के जरिए आम लोगों को सशक्त करने के उनके प्रयासों को याद किया। गुजरात के सामाजिक और सहकारी परिदृश्य को एक नई दिशा देने में उनकी भूमिका को ऐतिहासिक बताते हुए यह रेखांकित किया गया कि किस तरह उन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया।
गुजरात में सहकारिता और कार्यकर्ताओं के निर्माण में योगदान
गुजरात के भीतर सहकारिता आंदोलन को संगठित गति प्रदान करने में लक्ष्मणराव इनामदार का कार्य अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सहकारिता के आधारभूत ढांचे को केवल आर्थिक तंत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर लोगों के आर्थिक व सामाजिक उत्थान का सशक्त माध्यम बनाया। इसके साथ ही उन्होंने अनेक कार्यकर्ताओं को एक कुशल अभिभावक की भांति तराशने और गढ़ने का महती दायित्व निभाया, जिससे राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित एक पूरी पीढ़ी तैयार हो सकी।
कौन थे लक्ष्मणराव इनामदार
लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गुजरात क्षेत्र के शुरुआती प्रमुख मार्गदर्शकों में गिने जाते हैं और उन्होंने सहकारिता क्षेत्र के प्रमुख संगठन सहकार भारती की स्थापना भी की थी। आम जनमानस और स्वयंसेवकों के बीच वे सम्मानपूर्वक 'वकील साहब' के नाम से लोकप्रिय रहे। आजीवन अविवाहित रहकर सादगी और कठोर अनुशासन का पालन करने वाले इनामदार ने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक कार्यों और वैचारिक संगठन को समर्पित कर दिया। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरुआती सार्वजनिक जीवन और व्यक्तित्व निर्माण में भी उनकी अत्यंत निर्णायक और मार्गदर्शक भूमिका मानी जाती है, क्योंकि जिस दौर में नरेंद्र मोदी प्रचारक बने, उस समय लक्ष्मणराव इनामदार गुजरात के प्रांत प्रचारक के रूप में दायित्व संभाल रहे थे।
सहकारिता मॉडल से जमीनी सशक्तीकरण
सहकारिता क्षेत्र को आत्मनिर्भरता का आधार बनाने की जो वैचारिक नींव उस दौर में रखी गई, वह आज भी ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था में विशेष प्रासंगिकता रखती है। सहकार भारती जैसे मंच की स्थापना के माध्यम से उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि छोटे किसान, कारीगर और स्थानीय समुदाय अपनी सामूहिक शक्ति से आत्मनिर्भर बन सकें। उनके मार्गदर्शन में विकसित हुई इस संगठनात्मक कार्यशैली ने कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की भावना का संचार किया, जिसका प्रभाव आज भी नीतिगत और सामाजिक स्तर पर देखा जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस स्मरण संदेश पर आम लोगों ने बड़े पैमाने पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, जिनमें अधिकांश उपयोगकर्ताओं ने वकील साहब के अनुशासन, सादगी और राष्ट्र निर्माण के प्रति आजीवन समर्पण को नमन करते हुए उनके प्रेरक व्यक्तित्व को याद किया। वहीं कुछ नागरिकों ने सामाजिक आचरण, नागरिक अनुशासन और अन्य समसामयिक विषयों को लेकर अपने विचार साझा किए।


























