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दिल्ली इमारत हादसे पर शशि थरूर का फूटा गुस्सा, बोले- छात्रों के लिए सरकारी हॉस्टल बेहद जरूरीनेता जी
7 सित॰ 2026, 9:58 am (53 दिन पहले)· 2

दिल्ली इमारत हादसे पर शशि थरूर का फूटा गुस्सा, बोले- छात्रों के लिए सरकारी हॉस्टल बेहद जरूरी

दिल्ली में छात्रों के ठहरने वाली एक इमारत के ढहने से हुए भीषण हादसे पर शशि थरूर ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी हॉस्टलों की कमी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों की रिहायश वाली एक इमारत के अचानक ढह जाने से हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक दुर्घटना में कई छात्र मलबे में दब गए और बहुमूल्य जानें चली गईं, जिसके बाद सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल उठने लगे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस इमारत में मुख्य तौर पर छात्र रहते थे, और इस आपदा ने एक बार फिर देश के बड़े शहरी केंद्रों में छात्रों के रहने की सुरक्षित व्यवस्था की भारी कमी को उजागर कर दिया है।

शशि थरूर की तीखी प्रतिक्रिया और चिंता

इस दुखद घटना पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शशि थरूर ने इसे बेहद स्तब्ध करने वाला और हृदयविदारक करार दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के अलग-अलग कोनों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने राजधानी आने वाले युवाओं के लिए सुरक्षित आवासों का भारी अकाल है। सरकारी छात्रावासों की अनुपस्थिति के कारण छात्रों को ऐसी निजी और असुरक्षित इमारतों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है जहां न तो बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन होता है और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई निकासी मार्ग मौजूद होता है।

सुरक्षा में भारी चूक और जांच के दायरे में लापरवाही

हादसे के बाद सामने आई शुरुआती रिपोर्टों और तलों से पता चलता है कि जिस इमारत में छात्र रह रहे थे, उसमें कई तरह की गंभीर खामियां थीं। इमारत में बड़ी दरारें पहले से मौजूद थीं और सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि वहां कोई भी आपातकालीन निकास द्वार नहीं बनाया गया था। प्रशासन अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों और किसकी लापरवाही के चलते इस बहुमंजिला ढांचे में इतनी बड़ी चूक को नजरअंदाज किया गया। इस तरह की त्रासदियों में अक्सर यह देखने को मिलता है कि निर्माण नियमों की अनदेखी करने वालों पर शुरुआती हंगामे के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है।

देशभर में आवासीय संकट और बुनियादी ढांचे की अनदेखी

यह अकेली ऐसी घटना नहीं है जिसने शहरी भारत के बुनियादी ढांचे की पोल खोली हो, बल्कि समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी दिल दहलाने वाली खबरें सामने आती रही हैं। चाहे दिल्ली में इमारतों का ढहना हो या अन्य महानगरों में आग लगने और ढांचे के कमजोर होने के हादसे, हर बार बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। जानकारों और आम नागरिकों का मानना है कि तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी के दबाव के बीच सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही है और उचित हॉस्टल पॉलिसी न होने के कारण छात्र वर्ग सबसे ज्यादा पिस रहा है।

जनता की प्रतिक्रिया

इस মর্মান্তিক घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा और लोगों ने देश भर की आवासीय इमारतों के कड़े सेफ्टी ऑडिट की जोरदार मांग उठाई है। नागरिकों का कहना है कि हर हादसे के बाद केवल कागजी बयानबाजी और सहानुभूति प्रकट करने से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि इस दिशा में कड़े और जवाबदेह कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

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सवाल-जवाब

शशि थरूर ने किस घटना पर प्रतिक्रिया दी है?
शशि थरूर ने दिल्ली में छात्रों के आवास वाली एक इमारत के ढह जाने की दुर्घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
इस हादसे का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
इमारत में पहले से दरारें होना, आपातकालीन निकास का अभाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को इस हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
शशि थरूर ने किस बड़ी कमी का जिक्र किया है?
उन्होंने देश की राजधानी में सरकारी छात्र छात्रावासों के भारी अभाव और कमी का विशेष रूप से जिक्र किया है।
इस घटना में कौन लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं?
इस हादसे में मुख्य रूप से पढ़ाई के लिए राजधानी में रहने वाले छात्र प्रभावित हुए हैं।
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