दिल्ली की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो को लेकर भारी हंगामा मचा हुआ है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के एक मंत्री सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करते समय एक स्थानीय युवक को थप्पड़ मारते हुए नजर आ रहे हैं। इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे जनता की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक मंचों पर बहस छिड़ गई है और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
घटना का पूरा वाकया और वायरल वीडियो
सामने आए वीडियो के अनुसार, एक मंत्री इलाके में सड़क की खुदाई और निर्माण कार्यों का जायजा ले रहे थे। उसी दौरान वहां मौजूद एक नौजवान अपने कैमरे से पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। आरोप है कि जब उस युवक ने सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की, तो मंत्री ने कथित तौर पर अपना आपा खो दिया और उसे थप्पड़ जड़ दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसके बाद तमाम लोग इस आक्रामक रवैये की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया मंच पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह उस सत्ता का असली चेहरा है जिसे अब मतदाताओं का खौफ तक नहीं रहा है। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए लिखा कि यदि कोई नागरिक सड़क पर खड़े होकर सवाल पूछता है, तो उसे सीधे थप्पड़ मिलता है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी इस वीडियो को साझा करते हुए तीखा हमला बोला और कहा कि मंत्री के सामने जब सड़क की बदहाली उजागर होने लगी, तो उन्होंने अपनी नाकामी छुपाने के लिए हिंसा का सहारा लिया। इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले में कड़ा रोष व्यक्त करते हुए आरोपी मंत्री की तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठाई है।
अन्य दलों और विपक्षी नेताओं का हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी दल भी आक्रामक मुद्रा में आ गए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपने द्वारा दिए गए करों से बनने वाली बुनियादी सुविधाओं और सड़कों की गुणवत्ता जांचने का पूरा अधिकार है। जनता के सवालों से बचने के लिए इस तरह बल प्रयोग करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और तानाशाही सोच को दर्शाता है। विपक्षी खेमे का यह भी मानना है कि जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, न कि उनके कैमरों और सवालों पर इस प्रकार की हिंसक प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
जनता की प्रतिक्रिया
इस वायरल घटना के सामने आने के बाद आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई है, जिसमें अधिकांश लोगों ने मंत्री के इस आचरण की कड़ी निंदा की है और इसे सत्ता का नशा बताया है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और प्रशासन को इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।



























