विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की। यह उच्च स्तरीय बैठक अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संदर्भ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पर केंद्रित थी, जिसमें समुद्री सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। इस वैश्विक मंच पर उनके साथ ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज जेरापेट्रिटिस भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण सत्र का सह-संचालन किया।
समुद्री सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व
इस कार्यक्रम के दौरान तकनीकी प्रगति और भू-राजनीतिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग वैश्विक शांति को मजबूत करने के लिए कैसे किया जा सकता है। इसके अलावा, समुद्र में होने वाली गतिविधियों और नौवहन सुरक्षा की निगरानी में आधुनिक प्रणालियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
संभावित जोखिमों से निपटने की रणनीति
चर्चा के दौरान इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि तकनीकी विकास के साथ आने वाली चुनौतियों और परिणामों का समय रहते अनुमान लगाना बेहद जरूरी है। बैठक में शामिल नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि एआई के उपयोग से जुड़े जोखिमों को कम करने और पारदर्शी व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस उच्च स्तरीय बैठक और इसके उद्देश्यों को लेकर लोगों ने अपनी मिली-जुली और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं साझा कीं, जिसमें वैश्विक शांति के लिए तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।



























