न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच कूटनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच (FIPIC) के विदेश मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस संवाद में प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ विकास आधारित परियोजनाओं और आपसी प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत की विकास नीति
बैठक की अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशांत द्वीप देशों के प्रति भारत का दृष्टिकोण हमेशा से मांग-आधारित, विकास-उन्मुख और जन-केंद्रित रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत स्थानीय प्राथमिकताओं का पूरा सम्मान करता है और उनकी विकास यात्रा में लगातार सहयोग प्रदान करता रहेगा। इस मंच के माध्यम से क्षेत्रीय चुनौतियों और भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
FIPIC मंच और द्विपक्षीय वार्ताओं की पृष्ठभूमि
प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत का जुड़ाव लगातार मजबूत हुआ है। इससे पहले भी न्यूयॉर्क में FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया जा चुका है, जिसमें इन देशों के साथ दीर्घकालिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था। इसके साथ ही ब्रुनेई और पापुआ न्यू गिनी जैसे साझेदार देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं में भारत-प्रशांत प्राथमिकताओं और आपसी सहयोग को गति दी जाती रही है।
मजबूत होती प्रशांत कूटनीति का महत्व
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पापुआ न्यू गिनी में फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन के लिए यात्रा की रूपरेखा ने भी इस रणनीतिक रिश्ते को मजबूत आधार दिया था। भारत प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों की विकासात्मक जरूरतों, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण में सक्रिय सहयोग की नीति पर आगे बढ़ रहा है।


























