देश भर में मनाए जा रहे इंजीनियर्स डे के अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को उनकी जयंती पर नमन किया। उन्होंने देश के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में दिन-रात लगे सभी इंजीनियरों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इंजीनियरिंग की राह और चुनौतियाँ
अपनी बात रखते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह स्वयं इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा, "स्वयं इस मार्ग पर चलने के कारण मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि एक इंजीनियर बनने के लिए कितनी मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है।" उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे अभियंताओं के समर्पण को सराहा और देश के निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया का अतुलनीय योगदान
भारत में प्रतिवर्ष 15 सितंबर को महान दूरदर्शी और सिविल इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के रूप में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। उन्होंने देश में जल प्रबंधन, बांध निर्माण और सिंचाई प्रणालियों के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों की नींव रखी थी। उनके द्वारा बनाए गए डिजाइनों ने भारत के ढांचागत विकास को एक नई दिशा दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।
बेंगलुरु का शैक्षणिक ढांचा और यूवीसीई की स्थापना
शिक्षा और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में बेंगलुरु का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। सर एम. विश्वेश्वरैया ने स्वयं वर्ष 1917 में विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (यूवीसीई) की स्थापना की थी। यह संस्थान वर्तमान में यूवीसीई पब्लिक स्टेट यूनिवर्सिटी के रूप में संचालित होता है। शहर में उच्च शिक्षा का इतिहास काफी समृद्ध है, जहाँ वर्ष 1886 में बैंगलोर यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। इस विश्वविद्यालय के पास ज्ञानभारती और सेंट्रल कॉलेज नाम से दो बड़े परिसर हैं, जिनसे 500 से अधिक कॉलेज जुड़े हैं और 3 लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं।
विश्वविद्यालय का पुनर्गठन और तकनीकी शिक्षा
छात्रों की बढ़ती संख्या और संस्थानों के सुचारू प्रबंधन के उद्देश्य से वर्ष 2017 में बैंगलोर यूनिवर्सिटी का पुनर्गठन किया गया था। इसे तीन अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया, जिनमें बैंगलोर यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु नॉर्थ यूनिवर्सिटी और बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इसके अलावा, क्षेत्र के अनेक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज विस्वेस्वरया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (वीटीयू) से संबद्ध होकर तकनीकी शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस संदेश के आने के बाद आम नागरिकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने देश के विकास में इंजीनियरों के अमूल्य योगदान की प्रशंसा की। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की चुनौतियों, कोचिंग संस्थानों के बढ़ते वित्तीय बोझ और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।



























