राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे लाखों युवाओं की भीड़ पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच X पर सरकार को कड़े शब्दों में घेरा है।
केजरीवाल ने सरकार पर क्या आरोप लगाए
केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि जंतर-मंतर पर देश के कोने-कोने से लाखों की तादाद में युवा जमा हो चुके हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने के बजाय उन पर लाठियां बरसवा रही है। उन्होंने इसे गलत करार दिया और सरकार से सीधी अपील की कि ये युवा किसी और के नहीं बल्कि अपने ही देश के बच्चे हैं जो इंसाफ मांगने सड़कों पर उतरे हैं। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, "अहंकार छोड़िये और इनकी बात सुनिए।" इस पोस्ट में उन्होंने घटनास्थल से जुड़ा एक लिंक भी साझा किया।
हफ्तों से सुलग रहा है जंतर-मंतर
यह प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का धरना जून की शुरुआत से जंतर-मंतर पर चल रहा है, और इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जून के आखिरी हफ्ते से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। खबरों के मुताबिक जुलाई के मध्य तक वह करीब बीस दिनों से अनशन पर थे और उनके समर्थन में विपक्षी नेताओं व फिल्मी हस्तियों की भीड़ भी बढ़ती गई। इसी बीच 15 जुलाई को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रदर्शनकारी युवाओं के नाम एक खुला पत्र भी लिखा था। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक 19 जुलाई तक स्थिति और तनावपूर्ण हो चुकी थी, गेट के बाहर तक करीब एक किलोमीटर में भीड़ फैली हुई थी, कई प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे ज़मीन पर सोने को मजबूर थे और दिल्ली पुलिस हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए थी।
गया के बारे में
इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा में उभरे बिहार के गया शहर के बारे में बताएं तो यह राज्य का एक ज़िला मुख्यालय और दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जहां मगही यहां की क्षेत्रीय भाषा है। हिन्दू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों में इसका ऐतिहासिक महत्व है और रामायण-महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है। यह शहर तीन ओर से रामशिला, प्रेतशिला और ब्रह्मयोनि नाम की पथरीली पहाड़ियों से घिरा है, जबकि इसके पूर्व में फल्गू नदी बहती है, जिस वजह से यहां देशी-विदेशी पर्यटकों की भारी भीड़ लगी रहती है।




























