उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस विशेष अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। 22 से 28 अगस्त तक चले इस सात दिवसीय समारोह के दौरान परिसर में खेलकूद, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का व्यापक आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
सप्ताह भर चले विविध आयोजन और विशेष व्याख्यानमाला
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय परिसर में कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का आयोजन हुआ। 22 अगस्त से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत छात्रों के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जहाँ प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय दिया। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल साइंसेज, लोकतांत्रिक चेतना और तनाव प्रबंधन जैसे समकालीन विषयों पर विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। विषय विशेषज्ञों ने छात्रों को आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के प्रति जागरूक किया।
गोरखपुर के बारे में
गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र है। भौगोलिक स्थिति के अनुसार इसके पूर्व में देवरिया और कुशीनगर, पश्चिम में संत कबीर नगर, उत्तर में महराजगंज तथा सिद्धार्थनगर स्थित हैं। वहीं इसके दक्षिण में मऊ, आज़मगढ़ और आंबेडकर नगर जिले सीमा साझा करते हैं। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से यह क्षेत्र उच्च शिक्षा और शोध का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।
योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं। उन्होंने लिखा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का पंचम स्थापना दिवस समारोह युवाओं में ज्ञान, सेवा और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार का प्रतीक है। उन्होंने संस्थान को निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहने की शुभकामनाएं दीं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के इस संदेश के बाद आम नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई उपयोगकर्ताओं ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने जनता दरबार के आवेदनों के त्वरित निस्तारण, स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षक पात्रता प्रमाणपत्रों के मुद्दों और भूमि विवादों से संबंधित शिकायतों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।



























