रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के शासनकाल पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित किया। विचार मंच 'रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी' द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र में, राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके परिवर्तनकारी नेतृत्व के सफर पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याणकारी नीतियों में आए सकारात्मक बदलावों को रेखांकित किया।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर राजनाथ सिंह के विचार
राजनाथ सिंह ने 'अंडरस्टैंडिंग ट्रांसफॉर्मेटिव गवर्नेंस | मोदी @ 25' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे प्रधानमंत्री के दीर्घकालिक दृष्टिकोण की वजह से देश की प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा की। यह मील का पत्थर नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में 25 वर्षों के कार्यकाल को दर्शाता है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2001 में उनके गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ हुई थी। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में कई नीति विश्लेषक और राजनीतिक विचारक भी शामिल हुए, जिन्होंने शासन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
25 साल के सफर पर राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं
यह कार्यक्रम भाजपा (BJP) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के 25वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर आयोजित की जा रही चर्चाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। इस अवसर पर देश के कई अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी उनके नेतृत्व की सराहना की है। हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी के शासन की प्रशंसा करते हुए गरीबी उन्मूलन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी की आलोचना की थी। इसके साथ ही, भाजपा नेता नितिन नबीन ने भी प्रधानमंत्री के सेवाकाल को देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरक बताया है।
जनता की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री के इस संबोधन पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने सरकार के कार्यकाल की सराहना की और देश की सुरक्षा को लेकर संतोष व्यक्त किया, वहीं कुछ अन्य उपयोगकर्ताओं ने शिक्षा, रोजगार और योग्यता से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाते हुए अपनी चिंताएं भी जाहिर कीं।


























