उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में एक विशेष विकास कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें ₹569 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास एक साथ संपन्न किया गया। योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट के जरिए साझा की।
₹569 करोड़ से अधिक का निवेश, जनपद को मिली बड़ी सौगात
पीलीभीत में आयोजित इस कार्यक्रम में पहले से चल रही और पूरी हो चुकी परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया गया, और साथ ही कुछ नई योजनाओं की आधारशिला भी रखी गई। ₹569 करोड़ से ऊपर की लागत वाली ये तमाम परियोजनाएं लोक-कल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की गई हैं। इनसे पीलीभीत जनपद के निवासियों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है।
योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर की गई अपनी पोस्ट में इस कार्यक्रम का उल्लेख किया और स्पष्ट किया कि जनपद पीलीभीत में विभिन्न लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के लिए यह आयोजन खास तौर पर किया गया था। इस पहल को जनपद के विकास की रफ्तार को और तेज करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
लोकार्पण और शिलान्यास का दोहरा महत्व
इस कार्यक्रम में लोकार्पण यानी पहले से निर्मित परियोजनाओं को जनता को सौंपना और शिलान्यास यानी नई परियोजनाओं की आधिकारिक शुरुआत, दोनों शामिल थे। यह संयुक्त आयोजन इस बात का संकेत देता है कि एक तरफ जहां पहले की योजनाएं पूरी होकर अमल में आ रही हैं, वहीं भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए कार्यों की नींव भी डाली जा रही है। ₹569 करोड़ से अधिक के इस निवेश से पीलीभीत जनपद में बुनियादी ढांचे और जन-सेवाओं के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की ओर से जनपद स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का मकसद विकास योजनाओं को सीधे जनता तक पहुंचाना होता है। पीलीभीत का यह आयोजन भी उसी सोच का हिस्सा है, जहां स्थानीय नागरिकों को विकास परियोजनाओं से सीधे जोड़ने की कोशिश की गई।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर जनता की राय बंटी हुई नजर आई। एक ओर जहां कई लोगों ने प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना की और उत्साहपूर्वक समर्थन जताया, वहीं दूसरी ओर कई नागरिकों ने रोजगार की कमी, ग्रामीण इलाकों में सड़कों की दुर्दशा, बिजली आपूर्ति में बाधा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं और सवाल भी सामने रखे।



















