कांग्रेस नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में युवाओं और छात्रों के साथ एक बड़ा संवाद कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं। 'छात्रों की गूंज' नाम से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत राहुल गांधी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे लाखों अभ्यर्थियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे। सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, तो सत्ता का सिंहासन हिल जाएगा। कोटा और देहरादून के बाद अब यह अभियान उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े छात्र केंद्र प्रयागराज में पहुंचेगा, जहां राहुल गांधी सीधे छात्रों से उनकी परेशानियां सुनेंगे।
पेपर लीक और अटकी भर्तियों का उठा मुद्दा
राहुल गांधी ने देश भर में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ हो रहे अन्याय पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रयागराज जैसे शहरों में देश भर से आए लाखों युवा सालों-साल तक कठिन परिस्थितियों में रहकर विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ये छात्र भारी-भरकम फीस चुकाते हैं, आवेदन फॉर्म भरते हैं और महीनों तथा सालों तक परीक्षा की तारीखों का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन लगातार होने वाले पेपर लीक ने उनके वर्तमान को बर्बाद कर दिया है। इसके अलावा लंबे समय से अटकी पड़ी भर्ती प्रक्रियाओं ने युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और सपनों पर पानी फेर दिया है।
8 अगस्त के प्रयागराज कार्यक्रम की रूपरेखा
प्रयागराज में 8 अगस्त को होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर छात्र संगठनों और युवा समूहों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इससे पहले राजस्थान के कोटा और उत्तराखंड के देहरादून में भी 'छात्रों की गूंज' के बैनर तले ऐसे ही संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। कोटा और देहरादून में आयोजित इन बैठकों में भी प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की थी। अब प्रयागराज में होने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश तथा आसपास के राज्यों के प्रतियोगी छात्र बड़ी संख्या में एकत्र होकर राहुल गांधी के साथ संवाद करेंगे और बेरोजगारी, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली तथा पारदर्शी भर्ती व्यवस्था लागू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
प्रयागराज का शैक्षणिक और ऐतिहासिक महत्व
उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित प्रयागराज भारत के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण शहरों में से एक है। यह पवित्र नगरी गंगा, यमुना और गुप्त रूप से मिलने वाली सरस्वती नदी के त्रिवेणी संगम पर बसी हुई है, जिसके कारण इसे संगमनगरी और कुंभनगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां प्रत्येक छह वर्ष में अर्द्धकुंभ और प्रत्येक बारह वर्ष में भव्य कुंभ मेले का आयोजन होता है, जिसमें दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो मुगल सम्राट अकबर ने यहां एक विशाल किला बनवाया था और एक नई बसाहट बसाई थी, जिसे लंबे समय तक इलाहाबाद के नाम से जाना गया। अक्टूबर 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नगर का नाम पुन: प्रयागराज कर दिया। अपनी धार्मिक पहचान के साथ-साथ प्रयागराज उत्तर भारत का सबसे बड़ा छात्र केंद्र भी माना जाता है। यहां लाखों अभ्यर्थी सिविल सेवा, रेलवे, शिक्षक भर्ती और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे रहते हैं।
जनता और छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
राहुल गांधी की इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया और आम जनता के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अनेक युवाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पेपर लीक और समयबद्ध भर्ती प्रक्रियाओं के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना बेहद जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में भी आयोजित होने वाली परीक्षाओं पर सवाल उठाए। कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों में भी पेपर लीक और भर्ती में देरी की शिकायतें आई हैं, इसलिए रोजगार के मुद्दे पर केवल बयानबाजी के बजाय सभी राज्यों में एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत है।



























