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भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, आधुनिक हिंदी साहित्य में उनके योगदान को किया यादनेता जी
9 सित॰ 2026, 5:18 pm (2 घंटे पहले)· 2

भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, आधुनिक हिंदी साहित्य में उनके योगदान को किया याद

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश के प्रमुख नेताओं ने आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर उन्हें नमन किया। अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारतेंदु जी ने हिंदी को आधुनिक स्वरूप दिया और अपनी रचनाओं में भक्ति के साथ समाज सुधार, स्त्री शिक्षा तथा स्वाधीनता की चेतना को पिरोया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रणेता भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती के अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए गृह मंत्री ने भारतेंदु जी के युगांतरकारी साहित्यिक योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने रेखांकित किया कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी भाषा के भाव, भाषा शैली और अभिव्यक्ति के तरीकों में अभूतपूर्व नवीनता का समावेश करके उसे एक नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया था। अमित शाह के अनुसार, भारतेंदु जी की रचनाएं न केवल ईश्वर की पावन भक्ति से परिपूर्ण थीं, बल्कि उनमें सामाजिक चेतना, स्त्री शिक्षा के समर्थन और देश की स्वाधीनता का अत्यंत सशक्त संदेश भी शामिल था। गृह मंत्री के अलावा भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस अवसर पर हिंदी साहित्य के इस महान युगद्रष्टा को याद किया।

भारतेंदु हरिश्चंद्र का अमूल्य योगदान और अमित शाह का संदेश

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि आधुनिक हिंदी साहित्य के सर्वांगीण विकास में भारतेंदु जी की भूमिका ऐतिहासिक और अद्वितीय रही है। उन्होंने कहा कि 19वीं शताब्दी के उस ऐतिहासिक दौर में, जब देश सांस्कृतिक और बौद्धिक पुनर्जागरण से गुजर रहा था, भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी क्रांतिकारी लेखनी के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव और आत्मसम्मान का भाव जगाया। उनकी कृतियों में भक्ति भावना के साथ-साथ तत्कालीन भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों पर करारा प्रहार किया गया था। उन्होंने न केवल हिंदी गद्य और पद्य की नई विधाओं की सुदृढ़ नींव रखी, बल्कि हिंदी भाषा को आम जनमानस की बोलचाल और जनसंचार का अत्यंत प्रभावी माध्यम भी बनाया। देश के कई अन्य प्रमुख नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भारतेंदु जी की रचनाएं आज भी नई पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और सामाजिक जागृति की प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं।

कौन थे भारतेंदु हरिश्चंद्र: आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक

भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिंदी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काल का सर्वमान्य प्रवर्तक और पितामह माना जाता है। उनका जन्म 9 सितंबर को उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में हुआ था और उन्होंने बेहद अल्पायु में वह मुकाम हासिल किया जो युगों-युगों तक अमर रहेगा। भारतेंदु हरिश्चंद्र की बहुमुखी प्रतिभा और सामाजिक सरोकार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 16 वर्ष की छोटी सी उम्र में बच्चों के लिए एक स्कूल की स्थापना कर दी थी। उन्होंने अपने अल्प जीवनकाल में नाटक, निबंध, काव्य, पत्रकारिता और अनुवाद के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया। उनके समय के रचनाकारों और विचारकों के समूह को हिंदी साहित्य के इतिहास में 'भारतेंदु युग' के नाम से जाना जाता है। इस दौर में प्रताप नारायण मिश्र जैसे महान विचारकों और लेखकों ने समाज सुधार, स्वाभिमान और देशभक्ति को अपनी रचनाओं का मूल आधार बनाया। लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उनकी भव्य प्रतिमा का अनावरण भी उनकी इसी अक्षय कीर्ति का सम्मान प्रस्तुत करता है।

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार और सांस्कृतिक विरासत

हिंदी साहित्य और मौलिक लेखन को निरंतर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा वर्ष 1983 में 'भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार' की आधिकारिक शुरुआत की गई थी। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार भारतीय लेखकों द्वारा हिंदी भाषा में लिखे गए मौलिक और उत्कृष्ट साहित्य के लिए प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार योजना के अंतर्गत पत्रकारिता, जनसंचार, महिला कल्याण, बाल साहित्य और राष्ट्रीय एकीकरण जैसे गंभीर विषयों पर लिखी गई सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों को सम्मानित किया जाता है। भारतेंदु जी की 175वीं जयंती के विशेष अवसर पर देश के विभिन्न सांस्कृतिक केंद्रों, जैसे लखनऊ और नई दिल्ली में विशेष संगोष्ठियों और सम्मान समारोहों का गरिमामय आयोजन किया गया, जहां मेधावी छात्रों और युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार और आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण हैं कि भारतेंदु जी द्वारा प्रज्वलित की गई साहित्यिक ज्योति आज भी देश की सांस्कृतिक और भाषिक पहचान को समृद्ध कर रही है।

जनता की प्रतिक्रिया

गृह मंत्री अमित शाह के इस पोस्ट पर देश भर के साहित्य प्रेमियों, शिक्षकों और आम नागरिकों ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दी हैं। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भारतेंदु हरिश्चंद्र जी की प्रसिद्ध काव्य पंक्तियों को साझा करते हुए उन्हें भावपूर्ण नमन किया और हिंदी भाषा के संवर्धन के लिए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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सवाल-जवाब

गृह मंत्री अमित शाह ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को किस अवसर पर श्रद्धांजलि दी?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।
अमित शाह के अनुसार भारतेंदु जी ने हिंदी साहित्य में क्या बदलाव किए?
अमित शाह ने बताया कि भारतेंदु जी ने हिंदी के भाव, भाषा और शैली में नवीनता लाकर उसे आधुनिक स्वरूप दिया और समाज सुधार तथा स्वाधीनता की चेतना जगाई।
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कितनी उम्र में स्कूल खोला था?
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने महज 16 वर्ष की अल्पायु में बच्चों की शिक्षा के लिए एक स्कूल की स्थापना की थी।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार किस मंत्रालय द्वारा और कब शुरू किया गया?
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा वर्ष 1983 में शुरू किया गया था।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार किस क्षेत्र में दिया जाता है?
यह पुरस्कार भारतीय लेखकों द्वारा हिंदी भाषा में लिखे गए मौलिक साहित्य, पत्रकारिता, जनसंचार, महिला कल्याण और बाल साहित्य के लिए दिया जाता है।
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