नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर एक संदेश साझा करते हुए कहा है कि किसी भी देश की तरक्की की असली ताकत उसके नागरिकों के सामूहिक समर्पण और मेहनत में छिपी होती है। उनके मुताबिक जब समाज मिलकर पुरुषार्थ करता है, तभी राष्ट्र की समृद्धि टिकी रहती है और आगे बढ़ती है।
पोस्ट में क्या कहा गया
अपनी पोस्ट में नरेंद्र मोदी ने लिखा कि सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण बनी रहती है। उन्होंने जोड़ा कि यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को पूरा करने तक पहुंचाने का रास्ता तैयार करती है। यानी संदेश का मूल भाव यह है कि नीतियां और योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी के साथ मेहनत में जुटता है।
संस्कृत श्लोक से समझाया भाव
अपनी बात को और गहराई देने के लिए उन्होंने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जो इस तरह है:
यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता। नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥
इस श्लोक का सार यह है कि जहां उत्साह के साथ कामों की शुरुआत होती है, जहां आलस्य के लिए कोई जगह नहीं होती और जहां सही नीति और पराक्रम का मेल होता है, वहां समृद्धि स्थिर और निश्चित रूप से बनी रहती है। संदेश के जरिए यह जोड़ने की कोशिश की गई कि व्यक्तिगत और सामाजिक, दोनों स्तरों पर लगातार प्रयास ही असली कुंजी है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की मिलीजुली राय सामने आई। कुछ लोगों ने इस भावना से सहमति जताते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण सिर्फ नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सामूहिक इच्छाशक्ति से होता है। वहीं कई लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि समृद्धि श्लोकों से नहीं, आम लोगों की खुशहाली से तय होती है, और बेरोजगारी, पेपर लीक तथा महंगाई जैसे मुद्दों पर ठोस कदम की मांग करते हुए जवाबदेही पर जोर दिया।



















