पवन सिंह सावन में चिकन बनाते फंसे विवादों में, तिलक-लॉकेट पर भड़के लोगचित्रकूट में देवांगना घाटी के ऊंचे पहाड़ों पर बसा पंपापुर आश्रम, जहां आध्यात्म और प्रकृति का अनोखा मेलसोशल मीडिया पर छाए रवि किशन, 'मनी फॉलोज माई ब्रदर' मीम पर तोड़ी चुप्पीशाहजहांपुर के किसानों के लिए फूलगोभी की अगेती खेती से बंपर कमाई का मौकाअनुज अग्निहोत्री की यूपीएससी सफलता: 1997 के इस लोकप्रिय गाने ने ऐसे संभाला हौसलालाइव: यूएई का आरोप- ईरान ने तेल टैंकर पर किया हमला, ओमान ने होर्मुज़ वार्ता में प्रगति का दिया संकेतएलपीजी कनेक्शन पर ई-केवाईसी की अनिवार्यता, जानिए किन ग्राहकों पर गिरेगी गाजकिसान क्रेडिट कार्ड योजना: डिजिटल अपग्रेड और व्यापक दायरे से किसानों को मिल रहा है सीधा लाभघर पर ऐसे बनाएं बाजार जैसा मुलायम और ताजा मक्खन, मिनटों में छाछ और मक्खन हो जाएंगे अलगएक ही टेस्ट खेलकर समाप्त हो गया रॉबिन सिंह का रेड बॉल करियर, जानिए वनडे में कैसा रहा रिकॉर्ड
सामूहिक पुरुषार्थ ही राष्ट्र की समृद्धि की असली बुनियाद, नरेंद्र मोदी का सोशल मीडिया पर संदेशनेता जी
24 जून 2026, 8:28 am (46 दिन पहले)· 2

सामूहिक पुरुषार्थ ही राष्ट्र की समृद्धि की असली बुनियाद, नरेंद्र मोदी का सोशल मीडिया पर संदेश

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से ही राष्ट्र की समृद्धि बनी रहती है। अपनी बात को मजबूती देने के लिए उन्होंने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया।

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर एक संदेश साझा करते हुए कहा है कि किसी भी देश की तरक्की की असली ताकत उसके नागरिकों के सामूहिक समर्पण और मेहनत में छिपी होती है। उनके मुताबिक जब समाज मिलकर पुरुषार्थ करता है, तभी राष्ट्र की समृद्धि टिकी रहती है और आगे बढ़ती है।

पोस्ट में क्या कहा गया

अपनी पोस्ट में नरेंद्र मोदी ने लिखा कि सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण बनी रहती है। उन्होंने जोड़ा कि यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को पूरा करने तक पहुंचाने का रास्ता तैयार करती है। यानी संदेश का मूल भाव यह है कि नीतियां और योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी के साथ मेहनत में जुटता है।

संस्कृत श्लोक से समझाया भाव

अपनी बात को और गहराई देने के लिए उन्होंने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जो इस तरह है:

यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता। नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥

इस श्लोक का सार यह है कि जहां उत्साह के साथ कामों की शुरुआत होती है, जहां आलस्य के लिए कोई जगह नहीं होती और जहां सही नीति और पराक्रम का मेल होता है, वहां समृद्धि स्थिर और निश्चित रूप से बनी रहती है। संदेश के जरिए यह जोड़ने की कोशिश की गई कि व्यक्तिगत और सामाजिक, दोनों स्तरों पर लगातार प्रयास ही असली कुंजी है।

जनता की प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर लोगों की मिलीजुली राय सामने आई। कुछ लोगों ने इस भावना से सहमति जताते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण सिर्फ नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सामूहिक इच्छाशक्ति से होता है। वहीं कई लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि समृद्धि श्लोकों से नहीं, आम लोगों की खुशहाली से तय होती है, और बेरोजगारी, पेपर लीक तथा महंगाई जैसे मुद्दों पर ठोस कदम की मांग करते हुए जवाबदेही पर जोर दिया।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से ही राष्ट्र की समृद्धि बनी रहती है और यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है।
पोस्ट किस मंच पर की गई?
यह पोस्ट सोशल मीडिया मंच X पर साझा की गई।
पोस्ट में साझा किए गए श्लोक का क्या मतलब है?
श्लोक का सार है कि जहां उत्साह से काम शुरू होता है, आलस्य नहीं होता और नीति व पराक्रम का मेल होता है, वहां समृद्धि स्थिर रहती है।
संदेश का मूल भाव क्या है?
मूल भाव यह है कि नीतियां और योजनाएं तभी सफल होती हैं जब समाज का हर वर्ग जिम्मेदारी के साथ मेहनत करता है।
इस पोस्ट पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
लोगों की राय मिलीजुली रही, कुछ ने भावना से सहमति जताई तो कई ने बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगाई जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR