5 अगस्त 2026 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त किए जाने के सात साल पूरे हो गए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सात वर्ष पूर्व लिया गया यह निर्णय जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए एक निर्णायक नए अध्याय की शुरुआत साबित हुआ है। इस फैसले के बाद से क्षेत्र के विकास, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखे गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदलाव को बताया निर्णायक नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए क्षेत्र के पिछले सात वर्षों के सफर को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि सात साल पहले आज ही के दिन अनुच्छेद 370 और 35A इतिहास का हिस्सा बन गए थे, जिसने जम्मू कश्मीर और लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नए अध्याय की शुरुआत की।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विस्तार से बताया कि पिछले सात वर्षों के दौरान दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को नए अवसर और अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख में समृद्धि और समानता को लगातार बढ़ावा दिया जाता रहेगा।
2019 के फैसले की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक परिवर्तन
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संसद में ऐतिहासिक विधेयक पारित कर जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A को निष्प्रभावी कर दिया था। इसके साथ ही पूर्ववर्ती राज्य को दो नए केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित किया गया था। इस संवैधानिक बदलाव का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान के सभी प्रावधानों को संपूर्ण क्षेत्र में लागू करना, केंद्रीय कानूनों का विस्तार करना और आतंकवाद पर प्रभावी अंकुश लगाना था। सात वर्षों के इस कार्यकाल में डिजिटल कनेक्टिविटी, सड़क निर्माण, शिक्षा संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार किया गया है।
रक्षा मंत्री की सराहना और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला की टिप्पणी
अनुच्छेद 370 हटने की सातवीं वर्षगांठ पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी क्षेत्र में आए व्यापक परिवर्तन की सराहना की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक बदलावों के बाद से जम्मू कश्मीर और लद्दाख में सुरक्षा स्थिति मजबूत हुई है और विकास गतिविधियों को गति मिली है। दूसरी ओर, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने इस अवसर पर अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से जुड़े पुराने जख्म अभी पूरी तरह नहीं भरे हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं और स्थानीय आकांक्षाओं पर अपने विचार रखे।
जनता की प्रतिक्रिया
सामाजिक माध्यमों पर सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर आम नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने आतंकवाद में कमी, बेहतर कानून व्यवस्था और बढ़ते पर्यटन के लिए सरकार के कदम का समर्थन किया, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अपने सवाल कायम रखे।



























