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अंबाला ऑब्जर्वेशन होम में सामाजिक संस्थाओं ने बच्चों संग मनाया रक्षाबंधन, 60 किशोरों की कलाई पर सजी राखीहरियाणा
28 अग॰ 2026, 11:33 am (1 दिन पहले)· 2

अंबाला ऑब्जर्वेशन होम में सामाजिक संस्थाओं ने बच्चों संग मनाया रक्षाबंधन, 60 किशोरों की कलाई पर सजी राखी

अंबाला स्थित ऑब्जर्वेशन होम में कलाधारा ग्रुप और ओमकार सेवा वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों ने रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। इस अवसर पर करीब 60 बच्चों को राखी बांधकर मिठाई खिलाई गई और उनसे समाजहित में काम करने का संकल्प लिया गया।

हरियाणा के अंबाला स्थित ऑब्जर्वेशन होम में इस बार रक्षाबंधन का पर्व एक बेहद भावुक और यादगार माहौल में संपन्न हुआ। अपने परिवारों से दूर रह रहे बच्चों के जीवन में खुशी के कुछ पल घोलने के इरादे से कई समाजसेवी और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि संस्था के भीतर पहुंचे। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य इन किशोरों को यह अहसास कराना था कि वे समाज से कटे हुए नहीं हैं और त्योहारों का आनंद लेने का अधिकार उन्हें भी है। जब स्वयंसेवकों ने बच्चों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधे तो पूरे परिसर का वातावरण आत्मीयता से भर उठा।

प्रेम और भरोसे के धागों से गूंजा परिसर

इस विशेष कार्यक्रम में कलाधारा ग्रुप और ओमकार सेवा वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। संस्था परिसर में एकत्र हुए बच्चों का सबसे पहले पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। इसके बाद संस्था की महिला सदस्यों और युवतियों ने अत्यंत प्रेम भाव के साथ बच्चों को रक्षासूत्र बांधे। राखी बांधने की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात सभी बच्चों का मुंह मीठा कराया गया और उनके बेहतर एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

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केवल बालकों तक ही यह आयोजन सीमित नहीं रहा, बल्कि कलाधारा ग्रुप के सदस्यों ने वहां मौजूद ऑब्जर्वेशन होम के कर्मचारी वर्ग को भी राखी बांधी। इस आत्मीय व्यवहार से वहां कार्यरत कर्मचारी भी काफी अभिभूत दिखाई दिए। पूरे कार्यक्रम के दौरान परिसर का माहौल पारिवारिक उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था।

अपनों की याद और चेहरे पर मुस्कान

राखी बंधवाते समय बच्चों के चेहरों पर जहां एक ओर खुशी की हल्की मुस्कान तैर रही थी, वहीं दूसरी ओर कई बच्चों की आंखें अपने घर और परिजनों की याद में नम हो गईं। आमतौर पर रक्षाबंधन के पावन अवसर पर भाई अपनी बहनों से राखी बंधवाने के लिए अपने-अपने घर पहुंचते हैं, परंतु इन बच्चों के लिए अपनी बहनों और परिवार के सदस्यों के साथ यह दिन बिताना संभव नहीं था। अपनों से दूर होने के कारण कई बच्चों के मन में उदासी का भाव था।

ऐसे भावुक क्षणों में जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर उनकी सूनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधे, तो बच्चों को रिश्तों की गर्माहट और अपनेपन का अहसास हुआ। अपनी कलाई पर बंधी रंग-बिरंगी राखी को बच्चे देर तक निहारते रहे। यह रक्षासूत्र उनके लिए महज एक धागा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा संदेश था कि कठिन परिस्थितियों में भी समाज उनके साथ खड़ा है और उनके प्रति सहानुभूति रखता है।

सकारात्मक राह चुनने और समाजसेवा का संकल्प

कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कलाधारा ग्रुप की सदस्य मानसी ने बताया कि इस पहल की मुख्य मंशा केवल एक त्योहार की रस्म अदायगी करना नहीं था। इसका असली उद्देश्य इन बच्चों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और उन्हें सही राह पर चलने की प्रेरणा देना था। उन्होंने कहा कि अक्सर यहां रहने वाले बच्चों को अपनी बहनों से मिलने का अवसर नहीं मिल पाता, इसलिए रक्षाबंधन के दिन उन्हें भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के स्नेह का अहसास कराने का प्रयास किया गया।

मानसी के अनुसार, राखी बांधने के दौरान बच्चों से एक विशेष वादा भी लिया गया। उनसे आग्रह किया गया कि जब भी वे ऑब्जर्वेशन होम से बाहर अपनी सामान्य जिंदगी में लौटें, तो किसी भी प्रकार की गलत या गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा न बनें। इसके बजाय वे अपने जीवन को सही दिशा में मोड़ें और समाज व देश के हित में सकारात्मक कार्य करने का संकल्प लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राखी बच्चों के लिए विश्वास, सुरक्षा और अपनापन का एक मजबूत संदेश है।

त्योहारों में हर वर्ग की भागीदारी और सामाजिक दायित्व

कलाधारा ग्रुप के एक अन्य सदस्य करन ने कार्यक्रम के विवरण साझा करते हुए बताया कि इस आयोजन के दौरान लगभग 60 बच्चों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधे गए। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन हर परिवार के लिए खुशियां और उल्लास लाने वाला पर्व है। उनकी टीम का उद्देश्य यही था कि इन खुशियों को उन बच्चों के साथ साझा किया जाए जो अपनों से दूर हैं। बच्चों के संग इस पावन पर्व को मनाकर संस्था के सदस्यों को भी आत्मिक संतुष्टि और प्रसन्नता का अनुभव हुआ।

वहीं समाजसेवी विशाल वर्मा ने सामाजिक सरोकारों पर जोर देते हुए कहा कि त्योहार किसी एक वर्ग या समूह के लिए नहीं होते, बल्कि इन पर हर व्यक्ति का समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को त्योहारों के आनंद में शामिल करना पूरे समाज का नैतिक कर्तव्य है। इस आयोजन के माध्यम से बच्चों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि समाज उनसे मुंह नहीं मोड़ रहा है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में सुधार लाने और नई शुरुआत करने के अवसर प्रदान करने के लिए उनके साथ खड़ा है।

सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) की अध्यक्ष रंजीता Mehta (रंजीता मेहता) ने इस पूरी पहल की सराहना करते हुए इसे एक अत्यंत प्रशंसनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि ऑब्जर्वेशन होम में बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाना एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है। इससे बच्चों में यह विश्वास पैदा होता है कि लोग उनसे प्रेम करते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से अलग नहीं माना जाता।

रंजीता मेहता ने बताया कि युवतियों ने बेहद स्नेह से बच्चों को राखी बांधी, जिससे बच्चों के मन में सकारात्मक भावनाएं उत्पन्न हुईं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ऑब्जर्वेशन होम में समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न त्योहारों को बच्चों के साथ मिलकर मनाया जाता है ताकि उनके भीतर परिवार और समाज से जुड़े रहने की भावना हमेशा जीवित रहे।

सवाल-जवाब

अंबाला ऑब्जर्वेशन होम में रक्षाबंधन पर क्या कार्यक्रम आयोजित किया गया?
अंबाला ऑब्जर्वेशन होम में सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों ने पहुंचकर बच्चों को तिलक लगाया, राखी बांधी, मिठाई खिलाई और उनका हौसला बढ़ाया।
इस आयोजन में किन संस्थाओं ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम का आयोजन कलाधारा ग्रुप और ओमकार सेवा वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों द्वारा किया गया।
कितने बच्चों को राखी बांधी गई?
ऑब्जर्वेशन होम में रह रहे लगभग 60 बच्चों की कलाई पर राखी बांधी गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य बच्चों को समाज से जुड़े होने का अहसास कराना और उन्हें अपराध छोड़कर सकारात्मक राह चुनने के लिए प्रेरित करना था।
बच्चों से क्या संकल्प लिया गया?
बच्चों से वादा लिया गया कि वे ऑब्जर्वेशन होम से बाहर जाने के बाद दोबारा किसी गलत काम में शामिल नहीं होंगे और देश व समाजहित में काम करेंगे।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष रंजीता मेहता ने क्या कहा?
उन्होंने इस पहल को सराहनीय बताया और कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में सकारात्मक भावना पैदा होती है और वे खुद को समाज से अलग नहीं समझते।
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