राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन को लेकर देश में चल रही सियासी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी दल पर बड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च संस्था संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत का औपचारिक सम्मान करने से इंकार करना और उसका सीधा विरोध करना संविधान की भावना के खिलाफ है।
संसद की सर्वोच्चता और राजनाथ सिंह का बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि संसद से पारित नियमों का पालन करना सभी के लिए संवैधानिक बाध्यता है। उन्होंने लिखा, "कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम का सम्मान करने से न केवल इंकार करना, बल्कि सीधे सीधे विरोध करना, अत्यंत दुर्भाग्य जनक और संवैधानिक दृष्टि से बहुत गंभीर विषय है।" उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रगीत के पूरे छह छंद गाए जाने के सरकारी नियमों पर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।
वंदे मातरम विवाद और नियमों में बदलाव
यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने 150 साल पुराने इस ऐतिहासिक गीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके पूरे छह छंदों का गायन अनिवार्य करने का फैसला लिया। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रगीत का अनादर करने या इसके गायन में बाधा डालने पर सजा और जुर्माने के कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके जवाब में कांग्रेस ने केवल शुरुआती दो छंद गाने का ऐलान किया, जिससे दोनों पक्षों में टकराव बढ़ गया।
विपक्षी नेताओं की दलीलें और प्रतिक्रिया
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है। पार्टी सांसद शशि थरूर ने आधिकारिक आयोजनों में पूरा गीत अनिवार्य किए जाने को अनावश्यक और थोपा हुआ करार दिया। वहीं सांसद इमरान मसूद ने धार्मिक स्वतंत्रता तथा संविधान का हवाला देते हुए कहा कि वे राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े तो होंगे, लेकिन इसे गाएंगे नहीं। इस बीच सत्तारूढ़ दल ने सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है, जिससे दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बारे में
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी। 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ उभरे शुरुआती राष्ट्रवादी आंदोलनों में इसकी अहम भूमिका रही। महात्मा गांधी के नेतृत्व में वर्ष 1920 के बाद यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य केंद्र बनी और देश को आजादी दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई।



























