देश भर में मतदाता सूचियों में बदलाव और नामों को काटे जाने को लेकर चल रही बहसों के बीच अरविंद केजरीवाल ने चुनावी प्रक्रिया के डिजिटल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय स्तर पर तैनात अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों को सीमित कर पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की कोशिश की जा रही है।
अरविंद केजरीवाल के आरोप
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि नियमों के तहत केवल इलाके के ईआरओ को ही मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वेबसाइट के जरिए ईआरओ के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है और उनकी शक्तियां छीन ली गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में बैठे कुछ चुनिंदा लोगों के पास पूरे देश की मतदाता सूची का नियंत्रण आ चुका है, जिससे वे अपनी मर्जी के मुताबिक किसी का भी नाम जोड़ने या हटाने में सक्षम हैं।
देश भर में मतदाता सूचियों पर विवाद
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब कई राज्यों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भारी हलचल मची हुई है। पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख नाम हटाए जाने को लेकर बड़ा विवाद देखने को मिला था, जबकि उत्तराखंड में प्री एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 4.53 लाख नाम काटे जाने के बाद 8.39 लाख और नाम हटाने की तैयारी की गई थी। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश में एसआईआर के तहत नाम कटने पर पुन: पंजीकरण की प्रक्रिया और देश भर में ई-वेरिफिकेशन व रजिस्टर्ड मोबाइल पर ओटीपी के नए नियमों ने भी इस बहस को गहरा कर दिया है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कई लोगों ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करते हुए इसका समर्थन किया, वहीं अन्य उपयोगकर्ताओं ने इन दावों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए तीखी आलोचना की।



























