खरनाल मेले में हाईवे पर 25-30 सवारों वाली जीप से खतरनाक स्टंट, पुलिस ने जब्त किया वाहनवैश्विक सुस्ती के बीच दुनिया में सबसे तेज दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, प्रमुख अर्थशास्त्रियों का भरोसा बढ़ापलामू के किसान सतीश दुबे ने मौसमी के बाग में उगाई कुरथी, खाली जमीन से निकाला चारे और दाल का फॉर्मूलाप्राइवेसी नेटवर्क में तेज उछाल और संस्थागत निवेश के बीच ज़ीकैश में जोरदार तेजीधागे और आईने से संवारी अपनी दुनिया, रांची की बहनों ने हस्तशिल्प से जुटाई कॉलेज की फीसउत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में नार घाट का कारोबारी इतिहास, कभी पीतल और अनाज के बड़े बंदरगाह के रूप में थी पहचानचित्रकूट में सरयू नदी के पुराने बहाव क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाने की तैयारी, यूपी और एमपी प्रशासन ने शुरू किया संयुक्त सीमांकनकच्चे तेल में लगातार पांचवें दिन गिरावट, कूटनीतिक उम्मीदों और आपूर्ति चिंताओं में कमी से भाव फिसलेफेडरल रिजर्व के सख्त बयानों से अमेरिकी डॉलर में तेजी, इंडेक्स 100.70 के पास पहुंचाभारत के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला के लिए न्यूजीलैंड की 16 सदस्यीय टीम घोषित
निर्वाचन आयोग में असहमति के दावों पर बोले अखिलेश यादव, स्वतंत्र कामकाज पर खड़े किए सवालनेता जी
23 सित॰ 2026, 10:08 am (53 मिनट पहले)· 0

निर्वाचन आयोग में असहमति के दावों पर बोले अखिलेश यादव, स्वतंत्र कामकाज पर खड़े किए सवाल

समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग के आंतरिक फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों को लेकर चिंता जताई और संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णयों को लेकर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग के भीतर फैसलों पर दर्ज कराई गई आपत्तियों का हवाला देते हुए संस्था की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच बार-बार सामने आ रही असहमति एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सामान्य और पारदर्शी कामकाज पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है।

चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का मुद्दा

अखिलेश यादव ने दावा किया कि बीते 10 महीनों के दौरान निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के निर्णयों पर कुल 14 बार अपनी असहमति और औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि जब आयोग के अपने ही सदस्य लगातार फैसलों पर ऐतराज जता रहे हों, तो यह दर्शाता है कि संस्थान के सभी निर्णय सर्वसम्मति या बिना विवाद के नहीं लिए जा रहे हैं।

संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर जताई चिंता

सपा प्रमुख ने इस स्थिति को संस्थागत स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय के सदस्यों को निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से काम करने का अनुकूल माहौल नहीं मिल पा रहा है, तो इसका सीधा असर आयोग के निर्णयों की विश्वसनीयता पर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है, और वहां हर निर्णय पारदर्शी तथा सभी आयुक्तों की निष्पक्ष सहमति से लिया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव की टिप्पणी

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों का 14 बार फैसलों पर असहमति दर्ज कराना असाधारण है। उनके अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि चुनाव आयुक्त निष्पक्षता से अपना दायित्व पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वतंत्र संस्था के भीतर इस तरह की स्थिति लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

जनता की प्रतिक्रिया

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने आयोग के भीतर मतभेद को आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता का प्रमाण बताते हुए अखिलेश यादव पर संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया, जबकि कई समर्थकों ने उनके उठाए मुद्दों को जायज ठहराते हुए आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग को लेकर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के निर्णयों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जो संस्था के स्वतंत्र कामकाज पर सवाल खड़े करता है।
अखिलेश यादव ने यह बयान कहां दिया?
उन्होंने यह बयान अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट के माध्यम से साझा किया।
अखिलेश यादव के अनुसार इस असहमति का क्या अर्थ है?
उनका कहना है कि यह दर्शाता है कि चुनाव आयुक्त निष्पक्ष और सही तरीके से अपना दायित्व पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
इस बयान पर आम जनता की क्या प्रतिक्रिया रही?
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे संस्था की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया, जबकि अन्य ने आयोग के कामकाज की निष्पक्षता पर चिंता जताई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp