न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA81) की उच्चस्तरीय बैठकों के बीच भारत, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की। इस बैठक में तीनों देशों ने उन्नत तकनीकी, रणनीतिक क्षेत्रों और वैश्विक साझेदारी को विस्तार देने पर गहन विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने समकक्षों के साथ मुलाकात कर साझेदारी के नए आयामों की समीक्षा की। इस त्रिपक्षीय ढांचे का मुख्य उद्देश्य साझा हितों और पूरक क्षमताओं का लाभ उठाकर आधुनिक चुनौतियों से निपटना है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र और तकनीकी विस्तार
इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वास्थ्य विज्ञान, ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्राथमिक रूप से चर्चा की गई। तीनों देशों ने नवाचार को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। रणनीतिक स्तर पर यह साझेदारी हिंद महासागर और मध्य पूर्व के समुद्री तथा तकनीकी क्षेत्रों में परस्पर सहयोग को गहरा करने का प्रयास करती है। मई 2026 में अबू धाबी में हुई पूर्व वार्ता और दिसंबर 2024 में अरब सागर में आयोजित संयुक्त हवाई अभ्यास की पृष्ठभूमि में यह संवाद तीनों देशों के रक्षा और आर्थिक रिश्तों को नई गति प्रदान करता है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा
बैठक में शामिल होने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर भारत, यूएई और फ्रांस की त्रिपक्षीय वार्ता में भाग लेकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवाद का मुख्य केंद्र एआई, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य विज्ञान, ऊर्जा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में त्रिपक्षीय सहयोग को गति देना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तीनों देशों के साझा हित और एक-दूसरे की पूरक क्षमताएं व्यापक अवसरों का निर्माण करती हैं। शेख अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वैश्विक मंचों पर बहुपक्षीय सहयोग को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस घोषणा के बाद आम जनता और कूटनीतिक विश्लेषकों ने व्यापक समर्थन व्यक्त करते हुए इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बताया। कई नागरिकों ने जहां तकनीकी और ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले फायदों का स्वागत किया, वहीं कुछ लोगों ने विदेश में फंसे भारतीयों की सहायता और घरेलू आर्थिक मुद्दों पर भी सरकार से ध्यान देने का आग्रह किया।


























