आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने वैश्विक मंच पर अपनी वित्तीय स्थिति संभालने के लिए नौकरशाही में एक अहम नियुक्ति की है। पाकिस्तान प्रशासनिक सेवा की ग्रेड-20 अधिकारी मरियम कियानी को वॉशिंगटन डीसी स्थित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में कार्यकारी निदेशक का वरिष्ठ सलाहकार चुना गया है। यह पदस्थापन तीन साल की समयसीमा के लिए प्रतिनियुक्ति के आधार पर तय हुआ है, जिसका मकसद वाशिंगटन में वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ पाकिस्तान के आर्थिक तालमेल को मजबूत करना है।
प्रतिनियुक्ति और आधिकारिक अधिसूचना की शर्तें
पाकिस्तान के एस्टैब्लिशमेंट डिवीजन ने 7 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की। इसके तहत मरियम कियानी का कार्यकाल उनके कार्यभार संभालने के दिन से अगले तीन साल तक मान्य रहेगा। अधिसूचना के नियमों के मुताबिक तीन वर्ष की तय अवधि समाप्त होते ही वह स्वतः इस दायित्व से मुक्त हो जाएंगी। इस पद पर वह सैफुल्लाह डोगर का स्थान लेंगी, जिनका कार्यकाल कुछ महीने पहले ही समाप्त हो चुका था। हालांकि प्रधानमंत्री स्तर पर चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इस तैनाती को आईएमएफ के औपचारिक अनुमोदन के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
तीन वरिष्ठ अफसरों के बीच कड़ा मुकाबला
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से गठित विशेष कैबिनेट स्तर की समिति ने इस रणनीतिक पद के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों के नामों की सूची तैयार की थी। इन शॉर्टलिस्ट किए गए अधिकारियों के बीच पद को लेकर सीधा मुकाबला था। इस सूची में पहले स्थान पर मरियम कियानी थीं, जो पाकिस्तान प्रशासनिक सेवा की ग्रेड-20 अधिकारी हैं और वित्त प्रभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत रही हैं। उनके साथ सीमा शुल्क समूह के ग्रेड-20 अधिकारी मोअज्जम रजा और ग्रेड-20 अधिकारी नदीम अहसान के नाम भी शामिल थे। इन तीनों दावेदारों की योग्यता और कार्यशैली का मूल्यांकन करने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मरियम कियानी के लंबे प्रशासनिक रिकॉर्ड को प्राथमिकता देते हुए उनके नाम को मंजूरी दी।
प्रशासनिक अनुभव और वैश्विक योग्यता
मरियम कियानी के पास लोक प्रशासन, नीति निर्धारण, विदेशी वित्त और अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं के साथ काम करने का करीब 18 साल का लंबा प्रशासनिक अनुभव है। नई जिम्मेदारी से पहले वह वित्त प्रभाग में संयुक्त सचिव थीं और उन्होंने बाहरी वित्त प्रभाग में भी काम किया है। पाकिस्तान के लिए स्वीकृत 7 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण विस्तारित कोष सुविधा (ईएफएफ) कार्यक्रम के संचालन में भी वह प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिकारियों में शामिल रही हैं। उनकी शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। उन्हें सिडनी विश्वविद्यालय से 'ऑस्ट्रेलिया अवार्ड्स स्कॉलरशिप' और अमेरिका में प्रतिष्ठित 'हम्फ्रे फेलोशिप' मिल चुकी है। इसके साथ ही उनके पास कानून की डिग्री भी है और वह एफसीए तथा एसीसीए जैसी वाणिज्यिक योग्यताओं से भी लैस हैं।
आईएमएफ मुख्यालय में जिम्मेदारियों का दायरा
वॉशिंगटन डीसी में मरियम कियानी आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक कार्यालय का हिस्सा बनेंगी। यह कार्यालय पाकिस्तान सहित कुल 8 देशों के समूह का प्रतिनिधित्व करता है। अपनी इस नई भूमिका के दौरान वह आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड के समक्ष आने वाले तमाम जटिल आर्थिक प्रस्तावों, अनुच्छेद चार परामर्श से जुड़े नीतिगत दस्तावेजों और प्रमुख आर्थिक रिपोर्टों के विश्लेषण में बोर्ड का सहयोग करेंगी। वह वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान और उसके सहयोगी देशों के आर्थिक हितों को स्पष्टता से रखने का कार्य करेंगी।
आईएमएफ के वित्तीय पैकेजों पर पाकिस्तान की निर्भरता
बीते वर्षों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाले कर्जों पर अत्यधिक निर्भर रही है। आंकड़ों के अनुसार 2013-16 के ईएफएफ कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान ने लगभग 439.30 करोड़ एसडीआर हासिल किए थे। वर्ष 2020 में कोरोना संकट के समय देश ने 101.55 करोड़ एसडीआर प्राप्त किए, जबकि 2019-23 के ईएफएफ पैकेज के तहत 303.80 करोड़ एसडीआर की राशि ली गई थी। इसके अतिरिक्त जुलाई 2023 में हस्ताक्षरित स्टैंडबाई समझौते के तहत पूरे 225 करोड़ एसडीआर यानी करीब 3 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता निकाली गई थी।
हालिया मंजूरियां और बकाये का कुल हिसाब
सितंबर 2024 में आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 532 करोड़ एसडीआर यानी लगभग 7 अरब डॉलर का एक नया ईएफएफ पैकेज मंजूर किया था। इस कार्यक्रम के तहत मई 2026 तक 304 करोड़ एसडीआर की निकासी की जा चुकी थी। इसके बाद मई 2025 में आर्थिक लचीलापन और जलवायु सुधार के लिए 100 करोड़ एसडीआर (करीब 1.4 अरब डॉलर) का आरएसएफ कार्यक्रम स्वीकृत हुआ, जिससे मई 2026 तक 30.76 करोड़ एसडीआर निकाले गए। आईएमएफ के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2026 तक पाकिस्तान द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों से कुल मिलाकर 23,446.145 मिलियन एसडीआर (लगभग 23.45 अरब एसडीआर) की निकासी पूरी हो चुकी थी। 31 मई 2026 की स्थिति के अनुसार आईएमएफ के प्रति पाकिस्तान पर कुल बकाया ऋण लगभग 8.21 अरब एसडीआर दर्ज किया गया था।



















