पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार चला रहीं मरियम नवाज ने एक ऐसा बयान दिया है, जो इस्लामाबाद की सुरक्षा एजेंसियों के लिए असहज साबित हो सकता है. उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया कि उनके प्रांत के लिए फिलहाल सबसे बड़ा खतरा भारत की सीमा नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अपने भीतर पल रहा आतंकवाद है.
भारत नहीं, अपने ही मुल्क से डर
मरियम नवाज के मुताबिक पंजाब को इस वक्त भारत की तरफ से उतना बड़ा खतरा महसूस नहीं होता, जितना पाकिस्तान के दूसरे इलाकों से घुसपैठ करने वाले अपराधियों और आतंकियों से है. यह कबूलनामा इसलिए मायने रखता है क्योंकि दशकों से पाकिस्तान की पूरी सुरक्षा नीति भारत को केंद्र में रखकर बनती रही है और पूर्वी सीमा को ही मुल्क की सबसे बड़ी चिंता माना जाता रहा है. मरियम नवाज ने घरेलू अपराधी नेटवर्क को बड़ा खतरा बताकर इस पुरानी सोच को सीधी चुनौती दे दी है.
सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा से मिलती सीमाएं बनीं सिरदर्द
उन्होंने बताया कि पंजाब की सरहदें सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से मिलती हैं, और इन्हीं रास्तों से अवैध असलहा, तस्करी का माल, अपराधी गिरोह और चरमपंथी तत्व पंजाब में घुसने की फिराक में रहते हैं. निक साजन ने अपने X अकाउंट पर 5 सितंबर, 2026 को इस पूरे मामले का जिक्र करते हुए लिखा कि पंजाब में ज्यादातर मुसीबत बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से सटे इलाकों से आती है और इसे उन्होंने आंतरिक सुरक्षा की असली चुनौती करार दिया. यह टिप्पणी मरियम नवाज की उस बात से मेल खाती है कि प्रांतीय सीमाएं भारत की कड़ी निगरानी वाली सरहद के मुकाबले कहीं ज्यादा आसानी से पार की जा सकती हैं.
पाकिस्तान की पुरानी सुरक्षा सोच को झटका
इस्लामाबाद बरसों से भारत के साथ लगती सीमा को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केंद्र मानता आया है और इसी के इर्द-गिर्द बजट, फौजी तैनाती और सियासी बयानबाजी तय होती रही है. लेकिन पंजाब सरकार का ध्यान अब मुल्क के भीतर मौजूद आतंकी गुटों और अपराधी सिंडिकेट की तरफ मुड़ता दिख रहा है. अगर कोई प्रांतीय सरकार खुद मान रही है कि असली खतरा पूर्वी सरहद से नहीं, घर के भीतर से बड़ा है, तो आने वाले वक्त में पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति में प्रांतीय सीमाओं के प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और घरेलू चरमपंथ को ज्यादा तरजीह मिल सकती है, ना कि हर बार भारत पर उंगली उठाने को.
निगरानी के लिए बना पाकिस्तान का पहला सूबाई एआई हब
इस अंदरूनी चुनौती से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है. सूबे ने मुल्क का पहला प्रांतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब खड़ा किया है, जिसका मकसद एआई और डिजिटल निगरानी टूल्स के जरिए संदिग्ध हरकतों पर नजर रखना, शक के दायरे में आने वाले लोगों की आवाजाही ट्रैक करना और अपराधी नेटवर्क की गतिविधियों को पकड़ना है. अधिकारियों को उम्मीद है कि यह हब सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से पंजाब में घुसने की कोशिश करने वाले गिरोहों को पहले ही पकड़ने में मदद करेगा. यह पहल बताती है कि पंजाब सरकार आंतरिक सुरक्षा को सिर्फ पुलिसिंग नहीं बल्कि एक तकनीकी चुनौती की तरह भी देख रही है, और उसे भरोसा है कि रियल टाइम डिजिटल निगरानी वह काम कर सकती है जो अकेली फिजिकल गश्त नहीं कर पाई.


















