पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी हिंसा के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जहां बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने अपने सशस्त्र ढांचे में महिला लड़ाकों की औपचारिक विंग तैयार करने का दावा किया है। संगठन द्वारा जारी एक वीडियो में महिला सदस्यों को सैन्य प्रशिक्षण लेते, हथियारों का संचालन करते और मैदानी गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए दिखाया गया है। इस दावे के बाद प्रांत में पहले से ही संवेदनशील बने सुरक्षा हालात को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। हालांकि, इन दावों और जारी किए गए वीडियो फुटेज की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो सकी है, और न ही पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से इस पर कोई तत्काल आधिकारिक बयान आया है।
करीमा बलोच के नाम पर समर्पित नया दस्ता
अलगाववादी संगठन ने इस नवगठित शाखा का नाम 'करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन' (KAAD) रखा है। इस दस्ते का नामकरण बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन आजाद की पूर्व अध्यक्ष करीमा बलोच के नाम पर किया गया है, जो बलूच अलगाववादी राजनीतिक गतिविधियों से लंबे समय तक जुड़ी रही थीं। संगठन का कहना है कि इस विंग के गठन का उद्देश्य महिलाओं को सीधे सैन्य अभियानों और संगठनात्मक तंत्र में पूरी तरह शामिल करना है। वीडियो फुटेज में एक महिला कमांडर अन्य महिला सदस्यों को निर्देश जारी करती नजर आती है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि इस डिवीजन की कमान भी महिलाओं के हाथ में ही सौंपी गई है।
लड़ाकू मोर्चे के साथ खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी
संगठन के बयानों के मुताबिक, करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन का दायरा केवल अग्रिम मोर्चे की गोलीबारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। इस विंग की महिला सदस्यों को कई अन्य अहम जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं, जिनमें खुफिया सूचनाएं जुटाना, सामरिक संचार तंत्र को संभालना, प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना और सैन्य साजो-सामान के लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन शामिल है। संगठन इसे अपनी व्यापक रणनीति का हिस्सा बता रहा है, ताकि अग्रिम पंक्ति के लड़ाकों को हर स्तर पर संगठनात्मक बैकअप मिल सके।
हमलों और सैन्य काफिलों को निशाना बनाने के दावे
इस नई महिला इकाई के सक्रिय होने के साथ ही कई हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी भी इसी दस्ते पर डाली गई है। संगठन के अनुसार, तुरबत के पास चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़े राजमार्ग के जुसाक इलाके में एक पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था, जिसे इस डिवीजन की पहली प्रत्यक्ष सशस्त्र कार्रवाई बताया गया। इसके अतिरिक्त, संगठन ने दो अलग-अलग सैन्य अभियानों को अंजाम देकर नौ पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को हताहत करने का दावा भी सार्वजनिक किया है। इन अभियानों के दौरान कुछ सुरक्षा वाहनों को भारी नुकसान पहुंचाने की बात भी कही गई है।
राजमार्गों पर तलाशी अभियान और नाकाबंदी
महिला लड़ाकों की मौजूदगी केवल तुरबत तक सीमित नहीं बताई गई है, बल्कि कलात के मंगुचर इलाके में भी उनकी सक्रियता का दावा सामने आया है। वहां कथित तौर पर महिला सदस्यों ने वाहनों को रोककर तलाशी और जांच अभियान चलाया और सैन्य गतिविधियों में बाधा डाली। वहीं चागाई जिले से भी गंभीर गतिविधियां दर्ज की गईं, जहां याकमच क्षेत्र में हथियारबंद समूह के साथ महिलाओं के पहुंचने की जानकारी मिली। इसके बाद रणनीतिक रूप से अहम क्वेटा-तफ्तान राजमार्ग पर यातायात बाधित कर दिया गया। इसी इलाके में पाकिस्तान के राष्ट्रीय डेटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (NADRA) के एक दफ्तर को भी निशाना बनाकर आग के हवाले किए जाने का दावा किया गया।
रणनीतिक मार्गों पर बढ़ता सुरक्षा संकट
क्वेटा-तफ्तान राजमार्ग लंबे समय से अलगाववादी समूहों के निशाने पर रहा है, जहां आए दिन सुरक्षा बलों के काफिलों पर हमले, वाहनों की जबरन तलाशी और मार्ग अवरुद्ध करने की घटनाएं सामने आती रही हैं। मौजूदा साल में भी इस मार्ग पर कई हिंसक वारदातें देखी गई हैं। ऐसे में बलूचिस्तान के मौजूदा हालात के बीच महिला लड़ाकों की संगठित इकाई का सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई रणनीति तय करने की चुनौती पेश करता है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि प्रचार वीडियो और संगठन के दावों को बिना ठोस साक्ष्यों के वास्तविक जमीनी क्षमता मान लेना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में प्रांत में तनाव को और गहरा कर सकता है।



















