आर्थिक तंगी, बेलगाम महंगाई और आंतरिक अशांति से जूझ रहे पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी फतह-4 मिसाइल के उन्नत संस्करण का परीक्षण करके शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की है। ऑपरेशन सिंदूर में पहुंचे भारी नुकसान और रावलपिंडी तक महसूस किए गए झटकों के बाद, पड़ोसी देश के हुक्मरानों ने एक बार फिर अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए सैन्य प्रचार का सहारा लिया है। खजाना खाली होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय मदद की गुहार लगाने के बावजूद इस तरह के महंगे मिसाइल परीक्षणों पर भारी संसाधन बहाए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि भारत के पास मौजूद एस-400 ट्राइंफ जैसी बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली के सामने फतह-4 का टिक पाना पूरी तरह असंभव है।
फतह-4 के परीक्षण पर पाकिस्तान का प्रचार और दावे
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने इस परीक्षण को लेकर कई बड़े दावे पेश किए हैं। आधिकारिक बयानों में कहा गया है कि फतह-4 के इस उन्नत संस्करण में पहले से काफी बेहतर रेंज, आधुनिक एवियोनिक्स और नई नेविगेशन प्रणाली जोड़ी गई है। परीक्षण संपन्न होते ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने अपने वैज्ञानिकों और सैन्य इंजीनियरों को बधाइयां दीं। इसे देश के भीतर एक बड़ी सामरिक सफलता के रूप में प्रचारित किया गया, हालांकि विश्लेषक इसे केवल घरेलू जनता में राष्ट्रवाद की लहर पैदा करने और वास्तविक आर्थिक संकट से ध्यान भटकाने की सुनियोजित कोशिश मान रहे हैं।
मिसाइल की तकनीकी बनावट और रक्षा विशेषज्ञों के सवाल
पाकिस्तानी सेना फतह-4 को एक अत्यधिक सक्षम ग्राउंड-लॉन्च क्रूज मिसाइल के रूप में पेश कर रही है, जिसके संबंध में मुख्य रूप से तीन बड़े दावे किए गए हैं
- विस्तारित रेंज और मारक क्षमता: सेना का दावा है कि इसका एक्सटेंडेड वर्जन विरोधी पक्ष के रडार और एयर डिफेंस नेटवर्क को चकमा देकर लंबी दूरी तक हमला कर सकता है।
- आधुनिक नेविगेशन और जीपीएस: यह बात सामने रखी गई है कि नई नेविगेशन प्रणाली और जीपीएस के जरिए यह मिसाइल बेहद कम ऊंचाई पर उड़कर रडार की नजरों से बच निकलने में सक्षम है।
- सैटलाइट गाइडेंस: टर्मिनल फेज यानी निशाने के नजदीक पहुंचने पर यह मिसाइल तेजी से दिशा बदलकर सटीक हमला कर सकती है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय और भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का आकलन इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की इस मिसाइल प्रणाली के ज्यादातर अहम पुर्जे, तकनीकी डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चीन से हासिल किए गए हैं। बिना चीनी तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स और असेंबली बैकअप के पाकिस्तान का मिसाइल ढांचा स्वतंत्र रूप से लंबे समय तक खड़ा नहीं रह सकता।
भारत के एस-400 और त्रिस्तरीय रक्षा कवच के आगे बेअसर
भारतीय वायुसेना के पास तैनात एस-400 ट्राइंफ वायु रक्षा प्रणाली फतह-4 जैसी किसी भी सबसोनिक या लो-सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लिए अभेद्य दीवार साबित होती है। तकनीकी धरातल पर दोनों प्रणालियों का अंतर बेहद साफ है
- 250 से 400 किलोमीटर की दूरी पर ट्रैकिंग: एस-400 का आधुनिक रडार नेटवर्क फतह-4 जैसी क्रूज मिसाइल को लॉन्च होते ही 250 से 400 किलोमीटर की दूरी से ट्रैक करना शुरू कर देता है, जिससे उसे प्रतिक्रिया देने का भरपूर समय मिल जाता है।
- मैक 12 की हाइपरसोनिक रफ्तार: सबसोनिक या धीमी गति वाली क्रूज मिसाइलें एस-400 की हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइलों का मुकाबला नहीं कर सकतीं, जो मैक 12 तक की गति से उड़कर लक्ष्य को सीमा पार ही नष्ट करने की क्षमता रखती हैं।
- मजबूत बहुस्तरीय सुरक्षा: एस-400 के अलावा भारत के पास आकाश, बराक-8 और बीएमडी यानी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस जैसी विभिन्न स्तरों की सुरक्षा प्रणालियां सक्रिय हैं, जो भारतीय हवाई क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाती हैं।
कंगाली, आंतरिक कलह और सैन्य प्राथमिकताओं पर सवाल
ऐसे समय में जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ के कर्जों पर निर्भर है और आम जनता आटा, दाल, रसोई गैस व बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है, मिसाइल परीक्षणों पर करोड़ों डॉलर खर्च करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। देश के भीतर भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं, जहां बलूचिस्तान में बीएलए और उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में टीटीपी के हमलों ने सेना के सामने गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है। आए दिन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के जवानों और अफसरों को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन हुक्मरान बुनियादी मानवीय संकट को हल करने के बजाय भारत विरोधी आख्यान गढ़ने में व्यस्त हैं।
परीक्षण के पीछे के तीन मुख्य रणनीतिक मकसद
भू-राजनीतिक और सामरिक विश्लेषक पाकिस्तान के इस ताजा कदम के पीछे तीन प्रमुख कारणों की पहचान करते हैं
- जनता का ध्यान भटकाना: ऑपरेशन सिंदूर में हुए सैन्य नुकसान और आर्थिक तबाही से उपजे जनआक्रोश को दबाने के लिए फर्जी सैन्य गौरव का प्रदर्शन करना।
- सेना की गिरती साख बचाना: लगातार आंतरिक विफलता और सुरक्षा मोर्चों पर पिटने के बाद सेना का मनोबल ऊंचा दिखाने का प्रयास करना।
- वैश्विक मंच पर दबाव बनाना: दुनिया को यह जताना कि उनके पास उन्नत मिसाइल क्षमताएं हैं, ताकि अस्थिरता का डर दिखाकर वैश्विक वित्तीय संस्थानों से नए कर्जे हासिल किए जा सकें।
विश्लेषकों का स्पष्ट निष्कर्ष है कि आधुनिक युद्ध केवल प्रचार और दूसरे देशों से मिले कलपुर्जों के सहारे नहीं लड़े जाते, बल्कि इसके लिए मजबूत अर्थव्यवस्था, स्वदेशी तकनीकी क्षमता और अनुशासित रणनीति की जरूरत होती है। भारत ने स्पष्ट संदेश दे रखा है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तत्पर है।



















