पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक सरगर्मी के बीच सुरक्षा के नाम पर भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के विरोध प्रदर्शन को टालने के बाद भी प्रशासनिक तैयारियां थमी नहीं हैं, जिससे सरकारी खजाने पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए खड़े किए गए विशालकाय कंटेनरों और बाहर से बुलाई गई पुलिस फोर्स के रखरखाव पर शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक धन खर्च हो रहा है, और कुल खर्च के 100 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के आंकड़े को पार कर जाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
कंटेनरों का बढ़ता मीटर और भारी किराया
राजधानी के रास्तों को ब्लॉक करने के लिए कुल 1,550 कंटेनरों का इस्तेमाल किया गया है, जो इस पूरे सुरक्षा अभियान का सबसे महंगा हिस्सा साबित हो रहे हैं। ऑल पाकिस्तान गूड्स अलायंस के चेयरमैन निसार हुसैन जाफरी के अनुसार, विभिन्न आकारों के इन भारी वाहनों का किराया बातचीत के बाद प्रतिदिन 30 हजार पाकिस्तानी रुपये तय किया गया था। इस तय दर के आधार पर केवल इन 1,550 कंटेनरों का रोजाना का किराया लगभग 4.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपये बैठता है। हालांकि प्रदर्शन को एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया गया है, लेकिन ये कंटेनर अपनी जगहों पर ज्यों के त्यों खड़े हैं, जिससे सिर्फ एक हफ्ते में यह किराया करीब 32.55 करोड़ रुपये और दो हफ्तों में लगभग 65.10 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
पुलिस बलों के भोजन और आवास पर भारी खर्च
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य प्रांतों से भी भारी पुलिस बल को राजधानी में तैनात किया गया है। सिंध प्रांत से लगभग 2,000 जवान पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जिनके खान-पान की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रत्येक जवान के तीनों वक्त के भोजन पर लगभग 600 पाकिस्तानी रुपये खर्च हो रहे हैं, जिससे इन दो हजार जवानों के खाने का दैनिक खर्च करीब 12 लाख रुपये बनता है। इसके अलावा, पंजाब प्रांत से भी करीब 16 हजार जवानों को बुलाने का निर्देश दिया गया था, हालांकि रिपोर्ट के अनुसार 25 सितंबर की शाम तक उनका पहुंचना बाकी था। इसके बावजूद उनके संभावित भोजन का दैनिक खर्च करीब 96 लाख पाकिस्तानी रुपये आंका गया है, जो तैनाती से पहले ही बजट पर असर डाल रहा है।
वाहन किराए और होटल बुकिंग की लागत
सुरक्षा बलों को उनके विश्राम स्थलों से ड्यूटी स्थलों तक पहुंचाने के लिए परिवहन के साधनों पर भी बड़ा खर्च हो रहा है। प्रशासन ने आवाजाही के लिए 70 कोस्टर और 30 डबल-कैबिन गाड़ियां किराए पर ले रखी हैं, जिनमें केवल 70 कोस्टर का रोजाना का खर्च लगभग 10.5 लाख रुपये और 30 डबल-कैबिन वाहनों का खर्च करीब 3 लाख रुपये है। इस प्रकार इन वाहनों पर प्रतिदिन करीब 13.5 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस अधिकारियों के ठहरने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के 13 होटलों में 175 कमरे बुक किए गए हैं, जिनमें 246 इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ कर्मी ठहरे हुए हैं। इंस्पेक्टर से लेकर एसपी रैंक के 157 कमरों का दैनिक किराया ही लगभग 7.54 लाख रुपये है।
कब्जे में लिए गए वाहन और चालकों की स्थिति
इस पूरे सुरक्षा अभियान के दौरान एक और जटिल पहलू सामने आया है, जिसके तहत पुलिस और प्रशासन ने लगभग 2,700 कंटेनर वाहनों को उनके तीन-तीन चालकों के दल के साथ अपने कब्जे में ले लिया है। इनमें से करीब 400 वाहन और उनके चालक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि अन्य चालकों को विभिन्न थानों में रोककर रखा गया है। हालांकि पुलिस ने इनकी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं दिखाई है, लेकिन उन्हें थाने से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनके मोबाइल फोन, कागजात तथा गाड़ियों की चाबियां भी जब्त कर ली गई हैं। इन सभी वाहनों में करीब 450 वाहन ऐसे हैं जिनमें दवाइयां, खाद्य सामग्री और महत्वपूर्ण रसायन जैसे जरूरी सामान लदे हुए थे। प्रदर्शन भले ही फिलहाल स्थगित हो चुका है, लेकिन सुरक्षा प्रबंधों के नाम पर हो रही इन व्यवस्थाओं ने प्रशासनिक तंत्र और वित्तीय स्थिति दोनों को मुश्किल में डाल दिया है।


















