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सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को किया सिरे से खारिजपाकिस्तान
31 अग॰ 2026, 5:19 pm (50 दिन पहले)· 2

सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को किया सिरे से खारिज

भारत ने सिंधु जल संधि पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को मानने से साफ इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इस निकाय की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसके आदेशों का देश पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सिंधु जल संधि को लेकर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की ओर से आए हालिया फैसले पर भारत ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत न सिर्फ इस निर्णय को खारिज करता है, बल्कि उस निकाय के गठन को ही पूरी तरह अवैध मानता है। नई दिल्ली का मानना है कि यह संस्था संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करके बनाई गई थी, इसलिए इसके किसी भी निर्देश का भारतीय पक्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अवैध रूप से गठित निकाय का दावा खारिज

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में रेखांकित किया कि इस गैर-कानूनी तरीके से तैयार किए गए निकाय ने सिंधु जल संधि और अंतरिम उपायों से जुड़े मामलों पर अपना फैसला सुनाया है। सरकार का रवैया इस मामले में पूरी तरह से बेबाक और स्पष्ट रहा है। इस संस्था के पास भारत के संप्रभु अधिकारों और फैसलों के खिलाफ किसी भी तरह का आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने यह भी साफ किया है कि सीमा पार आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के बीच इस संधि के स्वरूप में बदलाव जरूरी है और देश अपने हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक तनाव

दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने इस समझौते को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और कोर्ट के फैसले को अपने पक्ष में बताते हुए इसे प्रभावी बनाए रखने की मांग की है। पाकिस्तानी नेताओं और पूर्व अधिकारियों ने इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी की है, जिसमें परमाणु युद्ध तक की धमकियां शामिल रही हैं। इसके बावजूद भारत ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं बरती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत तर्कों के साथ रखा है।

संधि के भविष्य पर भारत का दो टूक संदेश

भारत ने पहले ही यह बात स्पष्ट कर दी है कि सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं चल सकती है। देश लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं किया जाता, तब तक इस तरह के समझौतों पर पुनर्विचार करना आवश्यक है। चिनाब नदी और अन्य परियोजनाओं पर चल रहे कार्यों से भारत की स्थिति और मजबूत हुई है, जबकि पाकिस्तानी हलकों में इस पर गहरी चिंता देखी जा रही है।

सवाल-जवाब

सिंधु जल संधि पर भारत का ताजा रुख क्या है?
भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है और उस निकाय की वैधता को भी अस्वीकार कर दिया है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा?
मंत्रालय ने कहा कि अवैध रूप से गठित इस निकाय के पास भारत के संप्रभु फैसलों पर आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
भारत इस निकाय के फैसलों को क्यों नहीं मानता?
भारत के मुताबिक यह निकाय संधि की शर्तों और नियमों का उल्लंघन करके गठित किया गया था, इसलिए इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस विवाद के पीछे मुख्य वजह क्या है?
सीमा पार आतंकवाद और संधि के पुराने स्वरूप में बदलाव की आवश्यकता इस विवाद की मुख्य वजह है।
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