पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का जो फैसला लिया, उसकी आंच पाकिस्तान के खेतों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक महसूस की गई। पानी का संकट इतना गहराने लगा कि पाकिस्तानी अधिकारी 2025 के खरीफ सीजन की शुरुआत में ही पूरे सिस्टम में 21 फीसदी तक पानी की कमी का अनुमान लगाने लगे थे। झेलम और चिनाब नदी में घटते जल प्रवाह ने इस्लामाबाद की बेचैनी और बढ़ा दी। पंजाब और सिंध जैसे कृषि प्रधान प्रांतों में डर था कि सिंचाई के लिए जरूरी पानी ही नहीं मिलेगा। लेकिन इसके बाद मौसम ने ऐसा पलटा खाया कि पूरी तस्वीर ही बदल गई।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस संकट की तैयारी में पाकिस्तान जुटा था, वह आया ही नहीं। ऊपरी इलाकों में बर्फ तेजी से पिघली और अगस्त 2025 की भीषण बाढ़ ने हालात पलट दिए। जो देश पानी की किल्लत से जूझने को तैयार बैठा था, उसके जलाशय कुछ ही महीनों में लगभग पूरी क्षमता तक भर गए। हालांकि यह राहत स्थायी नहीं है, क्योंकि अब एक नया और कहीं बड़ा खतरा उसके सामने खड़ा है।
पानी की किल्लत के लिए कमर कस रहा था पाकिस्तान
पाकिस्तान की आधिकारिक रिपोर्ट बताती है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले उसके दो सबसे बड़े जलाशय टरबेला और मंगला लगभग डेड स्टोरेज स्तर के करीब पहुंच चुके थे। पिछले सीजन का बचा पानी भी नाममात्र का था। यही वजह थी कि अधिकारियों ने पूरे तंत्र में करीब 21 फीसदी जल कमी का अनुमान लगाया और सीजन भर की जल वितरण योजना तक टाल दी गई। सबसे ज्यादा मार पंजाब और सिंध पर पड़ने की आशंका थी, क्योंकि पाकिस्तान की सिंचित खेती का बड़ा हिस्सा इन्हीं इलाकों के भरोसे चलता है।
अधिकारियों की चिंता बेवजह नहीं थी। कई बैठकों में झेलम और चिनाब नदी प्रणाली के घटते प्रवाह पर गंभीर मंथन हुआ। एक बैठक में तो साफ कहा गया कि चिनाब नदी में भारत की ओर से कम आपूर्ति के चलते पैदा हुए संकट से निपटने के लिए जलाशयों को बेहद सावधानी से चलाना होगा, ताकि हर प्रांत को उसके हिस्से का पानी मिल सके।
फिर पलटी किस्मत, बाढ़ बनी वरदान
सीजन के दूसरे दौर में मौसम ने अप्रत्याशित करवट ली। ऊपरी सिंधु बेसिन में तापमान चढ़ा तो बर्फ तेजी से पिघलने लगी और नदियों में पानी का बहाव बढ़ गया। इसके बाद अगस्त 2025 के आखिर में चिनाब और पूर्वी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जमकर बारिश हुई, जिसने बड़े पैमाने पर बाढ़ ला दी। पाकिस्तान ने खरीफ सीजन के लिए 104.03 मिलियन एकड़ फीट (MAF) जल प्रवाह का अनुमान लगाया था, लेकिन असल में यह 122.36 MAF दर्ज हुआ, यानी अनुमान से करीब 18 फीसदी ज्यादा। इससे पूरा जल संतुलन ही उलट गया, जहां पहले कमी का डर था वहां अब जरूरत से ज्यादा पानी आने लगा।
बाढ़ और पिघलती बर्फ से मिले इस अतिरिक्त पानी का असर तुरंत दिखा। सितंबर 2025 तक पाकिस्तान के बड़े जलाशय करीब 99 फीसदी क्षमता तक भर चुके थे। सीजन की शुरुआत में जो जलाशय डेड स्टोरेज के पास थे, वे चंद महीनों में लबालब हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक कोटरी बैराज के नीचे बहकर समुद्र में गिरने वाले अतिरिक्त पानी की मात्रा 30.85 MAF तक पहुंच गई, जो अनुमानित मात्रा से तीन गुना और पिछले पांच साल के औसत से करीब 71 फीसदी ज्यादा थी। साफ है कि जिस संकट से पाकिस्तान कांप रहा था, उसे प्रकृति ने फिलहाल टाल दिया।
अब टरबेला डैम पर खड़ा बड़ा सवाल
बाढ़ ने भले ही पाकिस्तान को तात्कालिक राहत दे दी हो, लेकिन उसकी जल व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी ज्यों की त्यों बनी हुई है। सबसे ज्यादा फिक्र टरबेला जलाशय की घटती क्षमता को लेकर है। टरबेला पाकिस्तान के लिए महज एक बांध नहीं, बल्कि उसकी खेती और जल सुरक्षा की रीढ़ है। जब यह डैम बना था, तब इसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 9.68 MAF थी, जो अब घटकर करीब 5.73 MAF रह गई है। यानी दशकों में इसकी करीब 48 फीसदी क्षमता खत्म हो चुकी है। इसकी मुख्य वजह लगातार जमा हो रही तलछट यानी सेडिमेंट बताई जा रही है।
बाढ़ भी नहीं सुलझा सकती यह समस्या
सरकारी सर्वे के मुताबिक मई 2022 में टरबेला की लाइव स्टोरेज 5.827 MAF थी, जो मार्च 2026 तक घटकर 5.580 MAF रह गई। सबसे तेज गिरावट 2025 के दौरान दर्ज की गई। अधिकारियों का मानना है कि असामान्य रूप से ज्यादा तलछट आने के कारण यह हालत बनी। टरबेला डैम बिजली उत्पादन और सूखा प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी घटती क्षमता आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बाढ़ अतिरिक्त पानी तो दे सकती है, पर जलाशयों में जमती तलछट का इलाज नहीं कर सकती।
खाद्य सुरक्षा पर भी मंडराता खतरा
सिंधु बेसिन की सिंचाई प्रणाली पाकिस्तान की करीब 90 फीसदी कृषि उत्पादन जरूरतों को पूरा करती है। ऐसे में सिंधु नदी प्रणाली में आने वाला कोई भी बदलाव सीधे उसकी खाद्य सुरक्षा पर असर डालता है। यानी जलाशयों की घटती क्षमता और तलछट की समस्या सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अन्न भंडार की भी परीक्षा बन सकती है।













