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निकाय चुनाव में अनोखे रंग, बाउंसर के साथ पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी तो टोंक में टिकट बदलने से बगावतराजस्थान
31 अग॰ 2026, 5:18 pm (1 घंटे पहले)· 3

निकाय चुनाव में अनोखे रंग, बाउंसर के साथ पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी तो टोंक में टिकट बदलने से बगावत

राजस्थान निकाय चुनावों के नामांकन के दौरान अनोखी तस्वीरें सामने आई हैं। खाजूवाला में एक कांग्रेस उम्मीदवार बाउंसर लेकर पर्चा दाखिल करने पहुंचे, जबकि टोंक में टिकट बदलने से नाराज पूर्व सभापति ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।

स्थानीय निकाय चुनावों के नामांकन की प्रक्रिया के बीच राजस्थान के विभिन्न इलाकों से दिलचस्प और चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में खाजूवाला से एक कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन दाखिल करने का अंदाज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव मैदान में आमतौर पर प्रत्याशी अपने समर्थकों, शुभचिंतकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचते हैं, लेकिन यहां नजारा कुछ अलग ही देखने को मिला।

बाउंसर के साथ पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी

खाजूवाला में वार्ड नंबर 20 से कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनावी मैदान में उतरे साहबराम सोनी जब अपना नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे, तो उनके साथ एक बाउंसर भी नजर आया। पर्चा दाखिल करने के दौरान बाउंसर की मौजूदगी की तस्वीरें और वीडियो जब सामने आए, तो राजनीतिक हलकों में इस पर बहस छिड़ गई। सोशल मीडिया पर भी यह वाकया तेजी से वायरल होने लगा। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा था कि जनता के बीच जाकर वोट मांगने वाले एक जनप्रत्याशी को आखिर सुरक्षा के लिए बाउंसर रखने की आवश्यकता क्यों पड़ गई। इस बात पर भी चर्चाएं होने लगीं कि क्या प्रत्याशी को अपने ही क्षेत्र के मतदाताओं से किसी तरह का डर है या फिर इसके पीछे कोई और खास वजह है।

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शारीरिक स्थिति का दिया हवाला

चारों तरफ चर्चाएं बढ़ने के बाद साहबराम सोनी ने खुद सामने आकर इस पर अपनी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाउंसर को साथ रखने का कारण चुनाव के दौरान किसी प्रकार का भय या जनता को लेकर कोई आशंका नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है और वे विकलांग हैं, जिसके चलते उन्हें संभाल के लिए सहायता की जरूरत होती है। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद नामांकन के समय बाउंसर का साथ होना खाजूवाला के चुनावी माहौल में पूरी तरह से गर्माहट पैदा कर चुका है और वार्ड नंबर 20 की दावेदारी हर किसी की जुबान पर है।

टोंक में टिकट बदलने से उपजा विवाद

दूसरी तरफ टोंक जिले में भारतीय जनता पार्टी की ओर टिकट वितरण को लेकर एक अलग ही सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। यहां पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन को लेकर टिकट का पेंच फंसा, जिसके चलते उन्होंने अंततः नामांकन दाखिल ही नहीं किया। शुरुआती योजना के अनुसार लक्ष्मी जैन वार्ड नंबर 23 से अपनी दावेदारी पेश कर रही थीं और पूरी तैयारी में थीं, लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में बदलाव करते हुए उन्हें वार्ड नंबर 36 से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। जब उनका वार्ड बदला गया, तो लक्ष्मी जैन ने उस नए वार्ड से पर्चा भरने से साफ मना कर दिया।

किसी और का हक नहीं छिनने की बात

पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मी जैन ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी दूसरे वार्ड में जाकर वहां के स्थानीय व्यक्ति का हक नहीं छीनना चाहतीं। उनका मानना था कि वार्ड नंबर 36 में पहले से ही लोग अपनी मेहनत कर रहे हैं और वहां अचानक दूसरे वार्ड की दावेदार को उतारना सही नहीं है। इसी वजह से उन्होंने पार्टी द्वारा दिए गए टिकट पर वार्ड 36 से नामांकन दाखिल नहीं करने का कड़ा फैसला लिया। उनके इस कदम के बाद टोंक की स्थानीय राजनीति मेंवान राजनीतिक समीकरणों पर चर्चाएं तेज हो गईं और भाजपा के भीतरखाने की यह बात आम चर्चा बन गई।

भाजपा की जीत का किया दावा

नामांकन न भरने के बावजूद लक्ष्मी जैन ने पार्टी से किनारा नहीं किया है, बल्कि उन्होंने टोंक में भारतीय जनता पार्टी का ही बोर्ड बनने का पूरी मजबूती के साथ दावा किया है। उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे पार्टी के पक्ष में मतदान करें और उम्मीदवारों को जिताएं। इस प्रकार निकाय चुनाव के इन शुरुआती दिनों में खाजूवाला और टोंक से दो बिल्कुल अलग और अनोखी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने स्थानीय चुनावी सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया है। एक तरफ खाजूवाला में साहबराम सोनी का बाउंसर के साथ पहुंचना सुर्खियों में है, तो दूसरी तरफ टोंक में लक्ष्मी जैन का वार्ड बदले जाने के कारण चुनावी मैदान से हटना बड़ा राजनीतिक संदेश दे रहा है।

सवाल-जवाब

खाजूवाला में किस कांग्रेस प्रत्याशी का बाउंसर के साथ नामांकन चर्चा में आया?
वार्ड नंबर 20 से कांग्रेस प्रत्याशी साहबराम सोनी बाउंसर के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे।
साहबराम सोनी ने अपने साथ बाउंसर रखने की क्या वजह बताई?
उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति यानी विकलांग होने को बाउंसर रखने का कारण बताया।
टोंक में किस भाजपा नेता ने नामांकन दाखिल नहीं किया?
पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन ने टोंक में नामांकन दाखिल करने से इनकार कर दिया।
लक्ष्मी जैन को पार्टी ने किस वार्ड से टिकट दिया था?
पार्टी ने उन्हें वार्ड नंबर 23 के बजाय वार्ड नंबर 36 से प्रत्याशी बनाया था।
लक्ष्मी जैन ने चुनाव लड़ने से क्यों मना किया?
उन्होंने कहा कि वे दूसरे वार्ड में जाकर किसी दूसरे व्यक्ति का हक नहीं छीनना चाहतीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान सुरक्षा और टिकट वितरण को लेकर उपजे विवाद यह दर्शाते हैं कि धरातल पर राजनीतिक दलों का आंतरिक प्रबंधन कितना संवेदनशील हो चुका है। खाजूवाला में एक प्रत्याशी द्वारा शारीरिक स्थिति के कारण बाउंसर ले जाने की बात सामने आई, वहीं टोंक में वार्ड बदलने पर बगावत ने टिकट वितरण प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इस तरह की घटनाएं चुनावी अनुशासन और कानून-व्यवस्था के लिहाज से प्रशासनिक मोर्चे पर भी संवेदनशीलता बढ़ा देती हैं, क्योंकि ऐसे विवाद अक्सर तनाव और टकराव का रूप ले सकते हैं जिन पर पैनी नजर रखनी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

यह स्पष्ट है कि स्थानीय चुनाव अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और दलगत स्तर पर प्रतिष्ठा की जंग बन चुके हैं। जब एक तरफ शारीरिक अक्षमता के कारण सुरक्षा का सहारा लेना पड़ता है और दूसरी तरफ वार्ड परिवर्तन पर जमीनी कार्यकर्ताओं के हक के नाम पर बगावत होती है, तो यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर टिकिट वितरण और उम्मीदवारों की प्रबंधन क्षमता कितनी नाजुक स्थिति में है। आगामी मतदान के दौरान इन अंदरूनी असंतोषों का असर बूथ स्तर की सक्रियता पर सीधा पड़ेगा, जिससे स्थानीय समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।

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