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PoK में राशन और बिजली से शुरू हुआ गुस्सा अब बना सीधी चुनौती, प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना से कहा यहां से निकल जाओपाकिस्तान
16 जून 2026, 2:13 pm (88 दिन पहले)· 3

PoK में राशन और बिजली से शुरू हुआ गुस्सा अब बना सीधी चुनौती, प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना से कहा यहां से निकल जाओ

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में महंगाई और गेहूं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई बन गया है। रावलकोट की सभा में नेताओं ने पाकिस्तानी सेना पर राशन रोकने और भारत के साथ व्यापार बंद रखने का आरोप लगाया।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जो आंदोलन कुछ समय पहले रसोई के खर्च और गेहूं की कीमतों के सवाल पर शुरू हुआ था, उसका रंग अब पूरी तरह बदल चुका है। पहले लोग बिजली और राशन के बढ़े हुए बिलों से तंग आकर सड़कों पर उतरे थे, लेकिन अब उनकी मांगें सिर्फ रोजमर्रा की राहत तक सीमित नहीं रह गई हैं। अब यहां के लोग सीधे राजनीतिक हकों की बात करने लगे हैं और खुलकर पाकिस्तानी सेना के दमन का जवाब दे रहे हैं। हालत यह है कि कश्मीरी अब पाकिस्तान को वहां से निकल जाने तक की चुनौती दे रहे हैं।

रावलकोट की सभा में सेना पर तीखे हमले

हाल ही में रावलकोट में हुई एक बड़ी सभा इस बदलाव की गवाह बनी। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी और अवामी एक्शन कमिटी के नेताओं ने इस मंच से पाकिस्तानी सेना पर अब तक के सबसे कड़े हमले बोले। नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान इलाके में जरूरी आपूर्ति रोक रहा है और यहां के संसाधनों का शोषण कर रहा है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि पाकिस्तान लगातार भारत के साथ होने वाले आर्थिक लेन-देन को भी रोकता आया है।

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राशन रोककर बनाया जा रहा दबाव

सभा को संबोधित करते हुए JAAC नेता सरदार अमन ने पाकिस्तानी सेना पर सीधा आरोप लगाया कि वह PoK के लोगों के लिए रोजमर्रा की चीजों की आपूर्ति जानबूझकर सीमित कर रही है और इसके जरिए आर्थिक दबाव बना रही है। अमन ने कहा कि पाकिस्तान की सेना यहां तक कि लोगों का राशन तक रोक रही है। उनका दावा था कि अधिकारी आर्थिक हथकंडों के सहारे इस विरोध आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश में लगे हैं।

भारत के साथ वैकल्पिक व्यापार मार्ग की मांग

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अगर पाकिस्तान उन्हें जरूरी आर्थिक मदद और रोजमर्रा का सामान नहीं पहुंचा पा रहा, तो भारत के साथ वैकल्पिक व्यापार मार्ग खोले जाने चाहिए। अपने समर्थकों के बीच अमन ने ऐलान किया कि सभी व्यापार मार्ग जल्द खुलेंगे, फिर चाहे वे पाकिस्तान की ओर से हों या भारत की ओर से। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर और PoK के बीच नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार होने वाला व्यापार सालों से बंद पड़ा है। इसी वजह से कश्मीर और PoK के बीच किसी भी तरह का आर्थिक संपर्क पूरी तरह खत्म हो चुका है, और यहां के लोग खुद को आर्थिक और व्यापारिक रूप से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

हमारा राजनीतिक भविष्य सेना तय नहीं करेगी

पाकिस्तानी सेना को चुनौती देते हुए अमन ने दो टूक कहा कि सेना PoK के लोगों का राजनीतिक भविष्य तय नहीं करेगी। पाकिस्तान हमेशा यह तर्क देता आया है कि वहां तैनात सेना लोगों की भारत से रक्षा कर रही है। लेकिन अमन ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भारत से अपनी रक्षा करना हमारा अपना मामला है, यह आपका काम नहीं है, और पाकिस्तानी सेना को हमारे मुद्दों में दखल देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

मुजफ्फराबाद तक पहुंचेगा आंदोलन

अपने भाषण के आखिर में अमन ने भरोसा जताया कि यह आंदोलन रुकेगा नहीं और आगे चलकर PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद तक पहुंचेगा। आने वाले दिनों में इन विरोध प्रदर्शनों की रफ्तार बनी रहती है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन आंदोलन के भीतर से उठ रही बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि गेहूं की कीमतों और बिजली के बिलों से शुरू हुआ यह गुस्सा अब इस इलाके में पाकिस्तान के पूरे शासन मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती में तब्दील होता जा रहा है।

सवाल-जवाब

PoK में यह आंदोलन क्यों शुरू हुआ था?
यह आंदोलन शुरुआत में महंगाई, गेहूं की कीमतों और बिजली व राशन के बढ़े हुए बिलों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई बन गया है।
रावलकोट की सभा में किसने भाषण दिया?
JAAC नेता सरदार अमन ने सभा को संबोधित किया और पाकिस्तानी सेना पर राशन रोकने और आर्थिक दबाव बनाने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मांग है कि अगर पाकिस्तान जरूरी सामान नहीं पहुंचा सकता तो भारत के साथ वैकल्पिक व्यापार मार्ग खोले जाएं।
आंदोलन आगे कहां तक पहुंचने की बात कही गई है?
सरदार अमन ने कहा कि यह आंदोलन रुकेगा नहीं और आगे चलकर PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद तक पहुंचेगा।
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