पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। जगह-जगह भारी पुलिस बल और सैन्य टुकड़ियों को तैनात किया गया है, जबकि कई संवेदनशील इलाकों को आम लोगों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह सुरक्षा चक्र पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान को रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अडियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने के चलते बनाया गया है। 73 वर्षीय नेता की बिगड़ती सेहत के बीच अदालत के फैसले के बाद प्रशासन को उन्हें बेहतर इलाज के लिए नामी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है। हालांकि, इमरान खान के जेल परिसर से बाहर निकलने को लेकर शहबाज सरकार और प्रशासनिक अमले में गहरी घबराहट देखी जा रही है।
अडियाला जेल से शिफा अस्पताल तक कड़ा सुरक्षा घेरा
अडियाला जेल से लेकर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल तक के करीब 30 किलोमीटर लंबे मार्ग को सुरक्षा बलों ने एक तरह से अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है। वीवीआईपी काफिले की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए सेना, पंजाब पुलिस और फ्रंटियर कांस्टेबुलरी के जवानों को हर प्रमुख मोड़ और चौराहे पर तैनात किया गया है। राजधानी के मुख्य मार्गों पर अचानक बढ़ी इस सैन्य और पुलिस गतिविधि ने प्रशासनिक हलकों में भारी हलचल पैदा कर दी है। मार्ग में पड़ने वाले सभी संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि काफिले की रवानगी के दौरान किसी भी अनहोनी या कानून-व्यवस्था की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
अस्पताल का वार्ड E-4 सील: पुलिस छावनी में तब्दील हुआ परिसर
शिफा इंटरनेशनल अस्पताल परिसर के भीतर भी सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए हैं। अस्पताल के विशेष वार्ड E-4 को पूरी तरह खाली करा लिया गया है और सुरक्षा बलों ने इसे अपने सीधे नियंत्रण में ले लिया है। अडियाला जेल पुलिस, पाकिस्तान रेंजर्स और फ्रंटियर कांस्टेबुलरी के जवानों की संयुक्त टीमों ने इस पूरे वार्ड को चारों तरफ से घेर रखा है। वार्ड में आम मरीजों ही नहीं, बल्कि अस्पताल के नियमित मेडिकल स्टाफ को भी बिना कड़ी तलाशी और जांच के प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने के लिए इस्लामाबाद पुलिस के आईजी खुद अस्पताल पहुंचे। उच्च स्तरीय अधिकारियों की टीम ने आईजी को पूरे सुरक्षा खाके की विस्तृत जानकारी दी। अस्पताल की ओर आने वाले सभी पहुंच मार्गों और प्रवेश द्वारों पर मजबूत बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। इसके अलावा, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऊंची इमारतों और छतों पर स्नाइपर्स तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे अस्पताल परिसर किसी छावनी जैसा नजर आने लगा है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और 73 वर्षीय इमरान खान की सेहत
इमरान खान को जेल से निकालकर अस्पताल लाने का यह कदम पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए सख्त निर्देशों के बाद उठाना पड़ा है। शीर्ष अदालत ने सरकार को स्पष्ट आदेश दिया था कि इमरान खान को अविलंब एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर उनका समुचित इलाज कराया जाए। 73 साल के इमरान खान की सेहत को लेकर बीते कई महीनों से गंभीर चिंताएं जताई जा रही थीं। मुख्य रूप से उनकी आंखों की रोशनी कम होने और कई अन्य गंभीर शारीरिक समस्याओं की शिकायतें सामने आई थीं।
इमरान खान के परिजनों और पीटीआई के शीर्ष नेताओं ने बार-बार यह आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन उन्हें आवश्यक मेडिकल सुविधाएं मुहैया नहीं करा रहा है। इसके बाद यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी कैदी के स्वास्थ्य और उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें तुरंत शिफा अस्पताल भेजने का हुक्म सुनाया।
शहबाज सरकार की समीक्षा याचिका और प्रशासनिक घबराहट
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सत्ता पक्ष को सबसे बड़ा डर इस बात का सता रहा है कि इमरान खान के अस्पताल में शिफ्ट होते ही पीटीआई के समर्थक और कार्यकर्ता सड़कों पर एकत्र हो सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का जोखिम उत्पन्न हो सकता है। इसी आशंका के चलते सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका भी दायर की थी।
अपनी याचिका में सरकार ने तर्क दिया था कि किसी हाई-प्रोफाइल कैदी को सरकारी व्यवस्था से बाहर निजी अस्पताल में भेजना गलत मिसाल कायम कर सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख में कोई ढील नहीं दी और समीक्षा याचिका की दलीलों से परे आदेश पर अमल का दबाव बनाए रखा। अंततः प्रशासनिक तंत्र को झुकना पड़ा और भारी सुरक्षा घेरे के बीच इमरान खान को शिफा अस्पताल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
30 किलोमीटर लंबे मार्ग पर धारा 144 और शांति की अपील
अडियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के बीच पड़ने वाले 30 किलोमीटर के पूरे गलियारे में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके तहत किसी भी स्थान पर जनसभा, जुलूस या विरोध प्रदर्शन करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। दूसरी तरफ, पीटीआई के केंद्रीय नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि इमरान खान के इलाज की प्रक्रिया में कोई व्यवधान न उत्पन्न हो।
फिलहाल इस्लामाबाद में छाई खामोशी और सड़कों पर दिख रहा सुरक्षा अमला इस बात का गवाह है कि स्थिति बेहद संवेदनशील है। पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इमरान खान का यह मेडिकल ट्रांसफर बिना किसी बाधा के पूरा हो पाता है या फिर सरकार अंतिम समय में कोई नया प्रशासनिक कदम उठाती है।



















