पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। इस अंतरराष्ट्रीय संकट की सीधी मार पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे पाकिस्तान पर पड़ी है। पेट्रोलियम आपूर्ति में व्यवधान और आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने देश में वित्तीय और ऊर्जा दबाव को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन मितव्ययिता उपायों को मंजूरी दी है। यह सख्त नियम अगले तीन महीनों तक प्रभावी रहेंगे, जिनका मकसद ईंधन की खपत को सीमित करना तथा बिजली और प्राकृतिक गैस के राष्ट्रीय नेटवर्क पर संभावित लोड को नियंत्रित करना है।
शादी समारोहों में खानपान पर नियंत्रण और रात के समय पाबंदियां
नागरिक स्तर पर ऊर्जा की बचत और अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए प्रशासन ने वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक कार्यक्रमों पर कड़ी समय सीमा तय की है। शादी-ब्याह और निकाह के बाद आयोजित होने वाले वलीमा समारोहों में भोजन की बर्बादी रोकने के लिए सिंगल डिश व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। इसके तहत दावतों में व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त पर रोक रहेगी और केवल एक ही मुख्य व्यंजन परोसा जा सकेगा।
इसके साथ ही रात्रिकालीन गतिविधियों को सीमित करने के लिए सख्त समय सारिणी तय की गई है। सभी सामान्य बाजारों को रात 9 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने शटर गिराने होंगे। मैरिज हॉलों को रात 10 बजे तक अपने सभी आयोजन समाप्त करने का आदेश दिया गया है, जबकि रेस्तरां और खानपान प्रतिष्ठानों को रात 11 बजे तक बंद करना होगा। आम जनता की बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतों का ध्यान रखते हुए दवा की दुकानों और मेडिकल जांच प्रयोगशालाओं को इन समयबद्ध पाबंदियों से पूरी तरह अलग रखा गया है।
मंत्रालयों और सरकारी महकमों पर कड़े वित्तीय प्रतिबंध
प्रशासनिक स्तर पर संसाधनों की बचत सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने सरकारी मशीनरी के उपयोग पर भारी कटौती लागू की है। 17 सितंबर को घोषित इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक सरकारी वाहनों को मिलने वाले ईंधन कोटे में सीधे 50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। हालांकि आंतरिक सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जरूरी जनसेवाओं से जुड़े वाहनों को इस कटौती से छूट दी गई है।
इसके अलावा राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के नॉन-ईआरई बजट यानी गैर-कर्मचारी मदों वाले खर्च में 5 प्रतिशत की सीधी कटौती की गई है। सरकारी खजाने से किसी भी विभाग द्वारा नए वाहन खरीदने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकारी धन से आयोजित होने वाले सेमिनार, प्रशिक्षण सत्र और सम्मेलनों पर पूरी तरह रोक रहेगी। सरकारी अधिकारियों के लिए आधिकारिक रात्रिभोज आयोजित करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है, हालांकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सत्कार में दिए जाने वाले भोज को इस दायरे से बाहर रखा गया है।
अफसरों के दौरों पर रोक और वर्चुअल बैठकों के निर्देश
प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के यात्रा खर्चों पर नकेल कसते हुए अगले तीन महीनों तक सभी गैर-जरूरी आधिकारिक विदेश यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है। जिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को टाला नहीं जा सकता, उनमें मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को केवल इकोनॉमी क्लास में ही सफर करने का सख्त निर्देश दिया गया है। इसके अलावा बैठकों के नाम पर होने वाले अंतर-राज्यीय और घरेलू दौरों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सरकारी महकमों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी विभागीय और अंतर-मंत्रालयी परामर्श वर्चुअल माध्यम यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही निपटाएं। यात्रा भत्तों और आतिथ्य सत्कार में की जाने वाली इस कटौती का उद्देश्य सरकारी खजाने से विदेशी मुद्रा और गैर-उत्पादक पूंजी के निकास को न्यूनतम करना है।
पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल
इन मितव्ययिता उपायों की घोषणा से ठीक पहले 15 सितंबर को पाकिस्तान में ईंधन की खुदरा कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई थी। उस दौरान पेट्रोल की कीमत में 4.10 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की दर में 6.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इस संशोधन के बाद पेट्रोल की कीमत बढ़कर 384.34 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल का भाव 415.83 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
ईंधन की इन दरों ने परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की लागत में तेज इजाफा कर दिया है। पाकिस्तान इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ से प्राप्त 8 अरब डॉलर के कर्ज सहारे अपनी वित्तीय देनदारियां चुका रहा है, जबकि देश में महंगाई की आधिकारिक दर 11 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है।
ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय संकट का असर
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई यह तेजी सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में भड़के सैन्य टकराव से जुड़ी है। सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। विशेष रूप से सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए हवाई हमलों के बाद तेल परिवहन को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा था।
इस अंतरराष्ट्रीय संकट ने तेल के वैश्विक आयात पर अत्यधिक निर्भर देशों के लिए विकट स्थिति उत्पन्न कर दी है। ऊर्जा की वैश्विक कमी और डॉलर के मुकाबले कमजोर मुद्रा के कारण पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए घरेलू स्तर पर भारी कटौती और पाबंदियों का सहारा ले रहा है।



















