खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट इलाके में स्थित ओल्ड पुलिस लाइंस परिसर पर हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पड़ोसी मुल्कों के बीच कूटनीतिक और सामरिक तनाव गहरा गया है। इस हमले के फौरन बाद तालिबान प्रशासन ने इस्लामाबाद को चेताया है कि वह आतंकी घटनाओं का बहाना बनाकर अफगानिस्तान की संप्रभु सीमाओं का अतिक्रमण न करे। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने स्पष्ट किया है कि यदि पाकिस्तानी सेना सीमा पार किसी भी प्रकार का सैन्य अभियान चलाती है, तो अफगान सुरक्षा बल अपनी जमीन और संप्रभुता की हिफाजत के लिए पूरी ताकत से जवाब देंगे।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के बहाने पर सख्त ऐतराज
अल अरबिया के साथ बातचीत करते हुए जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि यदि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा का हवाला देकर अफगान धरती पर हवाई या जमीनी कार्रवाई की योजना बना रहा है, तो काबुल इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का पूरा वैधानिक अधिकार है। तालिबान की ओर से यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि पाकिस्तानी हुकूमत पिछले कुछ समय से यह संकेत देती रही है कि वह सीमा पार आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगी। तालिबान ने साफ कर दिया है कि ऐसी कोई भी हिमाकत दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव खड़ा कर देगी।
कोहाट पुलिस मुख्यालय में खूनी मंजर और 31 मौतें
यह तल्खी शुक्रवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में बने ओल्ड पुलिस लाइंस परिसर पर हुए बड़े आतंकी हमले के बाद उपजी है। यह परिसर अत्यंत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहाँ जिला पुलिस मुख्यालय के अलावा काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट और स्पेशल ब्रांच समेत कई अहम सुरक्षा विंग्स के दफ्तर मौजूद हैं। आतंकियों ने इसी परिसर को निशाना बनाकर हमला बोला। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 31 लोगों की जान चली गई, जिनमें 16 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। परिसर के स्पेशल ब्रांच वाले हिस्से में कुछ हथियारबंद हमलावर छिपे हुए थे, जिन्हें मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों को घंटों तक मुठभेड़ करनी पड़ी।
TTP के आरोपों पर दोनों पक्षों में गहराया अविश्वास
इस्लामाबाद का लंबे समय से यह आरोप रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में पनाह लिए हुए हैं और वहीं से पाकिस्तानी ठिकानों पर हमलों की रूपरेखा तैयार करते हैं। पाकिस्तान का दावा है कि काबुल की तालिबान सरकार इन उग्रवादियों को नियंत्रित करने में या तो पूरी तरह नाकाम साबित हुई है या फिर उन्हें जानबूझकर सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रही है। हालांकि तालिबान प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। मुजाहिद ने पलटवार करते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा कमजोरियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने के बजाय अपनी समस्याएं खुद सुलझानी चाहिए। उन्होंने यह तर्क भी रखा कि TTP और बलूच गुटों से जुड़ी हिंसा तालिबान के सत्ता में आने से बहुत पहले से पाकिस्तान के भीतर चल रही है।



















