लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने सदन में 20 बागी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है, जिस पर अब कांग्रेस पार्टी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
अध्यक्ष ने क्या मंजूरी दी
नई व्यवस्था के तहत वे 20 सांसद, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाया है, अब लोकसभा में अपनी पार्टी की बाकी बेंचों के साथ नहीं बैठेंगे, बल्कि उन्हें एक अलग सीट ब्लॉक दिया जाएगा। इस फैसले से पार्टी के संसदीय दल के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान अब औपचारिक रूप ले चुकी है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने अध्यक्ष के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह तो होना ही था।" उनकी इस टिप्पणी से साफ है कि कांग्रेस को टीएमसी के संसदीय दल में बिखराव पहले से ही अपेक्षित था और वे अध्यक्ष के इस कदम को उस दरार की औपचारिक स्वीकृति के तौर पर देख रहे हैं।
टीएमसी का बागियों पर आरोप
निलंबित टीएमसी नेता रिजू दत्ता ने बागी सांसदों को लेकर कहा, "उन्होंने साफ तौर पर एनडीए का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है।" यानी पार्टी के भीतर से ही यह आरोप लगाया जा रहा है कि जिन 20 सांसदों को अब अध्यक्ष ने अलग बैठाया है, वे टीएमसी के बजाय सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
आगे क्या मायने रखता है
अध्यक्ष के कार्यालय द्वारा बागी गुट को लोकसभा में अलग पहचान दिए जाने के बाद टीएमसी के संसदीय दल की आंतरिक फूट अब सदन के फर्श पर भी साफ दिखने लगी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पर सबकी नजर टिकी है, और आने वाले दिनों में इन 20 सांसदों का रुख लोकसभा के आंकड़ों और गठबंधनों पर पड़ने वाले असर के लिहाज से बारीकी से देखा जाएगा।

















