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पिछले साल से 8 दिन छोटा होगा इस बार का संसद सत्र, बागी सांसदों पर भी होगा फैसलाराजनीति
4 जुल॰ 2026, 4:20 pm (45 दिन पहले)· 2

पिछले साल से 8 दिन छोटा होगा इस बार का संसद सत्र, बागी सांसदों पर भी होगा फैसला

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब आठ दिन छोटा है। इस दौरान टीएमसी और यूबीटी के बागी सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष का फैसला भी आ सकता है।

संसद का मानसून सत्र इस साल 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है। इस सत्र में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर गंभीर बहस और चर्चा होने की उम्मीद है, और कई बड़े फैसले भी लिए जा सकते हैं।

सूत्रों की मानें तो सरकार इस सत्र में कई अहम बिल पेश कर सकती है। साथ ही यह सत्र हंगामेदार भी रह सकता है, क्योंकि विपक्ष राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के आसार साफ नजर आ रहे हैं।

पिछले साल से छोटा होगा इस बार का सत्र

2025 में मानसून सत्र काफी लंबा चला था। पिछला सत्र 21 जुलाई 2025 से 21 अगस्त 2025 तक, यानी कुल 32 दिन चला था और इस दौरान दोनों सदनों में 15 विधेयक पारित हुए थे। इस बार तस्वीर अलग है। इस साल का मानसून सत्र सिर्फ 24 दिन का निर्धारित किया गया है, यानी पिछली बार के मुकाबले करीब आठ दिन कम। छोटी अवधि के बावजूद सरकार पर इस सत्र में कामकाज तेजी से निपटाने का दबाव रहेगा।

टीएमसी और यूबीटी के बागियों की किस्मत का फैसला

यह सत्र एक और वजह से खास रहेगा। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में हाल में हुई टूट के बाद संसद का यह पहला सत्र होगा। टीएमसी के लोकसभा में मौजूद 28 सदस्यों में से 20 ने पार्टी की लीडरशिप के खिलाफ बगावत करते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। इसी तरह यूबीटी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इन दोनों घटनाक्रमों से लोकसभा में एनडीए की संख्या बल और मजबूत हो गया है। हालांकि अलग गुट के तौर पर मान्यता मांग रहे इन बागी टीएमसी और यूबीटी सदस्यों के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का फैसला अभी आना बाकी है, और इस सत्र में इस पर स्पष्टता मिल सकती है।

राज्यसभा में मजबूत हुआ एनडीए, संविधान संशोधन बिल पर निगाहें

राज्यसभा में भी तस्वीर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में बदली है। उच्च सदन के हालिया चुनावों के बाद एनडीए के सदस्यों की संख्या बढ़ी है। यह सत्र सत्ताधारी गठबंधन और इंडिया गठबंधन, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पिछला बजट सत्र सरकार के लिए निराशाजनक साबित हुआ था और संविधान संशोधन बिल लोकसभा से पास नहीं हो सका था। कुछ अपुष्ट खबरों में यह भी दावा किया जा रहा है कि सरकार इस मानसून सत्र में उस बिल को दोबारा सदन में ला सकती है, हालांकि इस बारे में अभी तक कोई ठोस या आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सत्र के दौरान सरकार अपना एजेंडा किस तरह आगे बढ़ाती है और विपक्ष किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा दबाव बनाता है।

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सवाल-जवाब

संसद का मानसून सत्र कब से कब तक चलेगा?
यह सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा।
इस सत्र को किसने मंजूरी दी?
सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी, जिसकी जानकारी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दी।
पिछले साल मानसून सत्र कितने दिन चला था?
2025 में मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक, यानी कुल 32 दिन चला था और इसमें 15 विधेयक पारित हुए थे।
इस बार सत्र कितने दिनों का होगा?
इस बार सत्र सिर्फ 24 दिन का निर्धारित किया गया है, जो पिछले साल से करीब आठ दिन छोटा है।
टीएमसी और यूबीटी में क्या टूट हुई है?
टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सदस्यों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया, जबकि यूबीटी के नौ में से छह सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए।
बागी सांसदों पर फैसला कौन लेगा?
अलग गुट की मान्यता मांग रहे बागी टीएमसी और यूबीटी सदस्यों पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फैसला लेंगे।
क्या संविधान संशोधन बिल इस सत्र में फिर पेश होगा?
कुछ अपुष्ट खबरों में दावा है कि सरकार बिल को दोबारा ला सकती है, लेकिन इसकी अभी कोई पुष्ट या आधिकारिक जानकारी नहीं है।
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