विपक्षी नेताओं ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि नए परिसीमन विधेयक के जरिए विपक्ष के पारंपरिक वोट बैंक को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि सत्ताधारी पार्टी सत्ता में बनी रह सके। यह आरोप पश्चिम बंगाल से जुड़े एक ठोस दावे के बाद और सुर्खियों में आया है, जहां ममता बनर्जी ने कहा है कि भाजपा परिसीमन की कवायद के जरिए राज्य को तीन हिस्सों में बांटना चाहती है।
परिसीमन का मतलब वोटरों के लिए क्या है
परिसीमन का मतलब है विधानसभा और लोकसभा सीटों की सीमाएं दोबारा तय करना, ताकि आबादी के ताजा आंकड़ों को ध्यान में रखा जा सके। इस प्रक्रिया से किसी इलाके को मिलने वाली सीटों की संख्या और उनकी सीमाएं दोनों बदल सकती हैं, जिससे किसी भी पार्टी को किसी खास इलाके में फायदा या नुकसान हो सकता है। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर सीमाएं इस तरह खींची जाएं कि उनका मौजूदा वोट बैंक कई अलग अलग सीटों में बंट जाए, तो कुल समर्थकों की संख्या न बदलने पर भी उनका असर कमजोर पड़ सकता है।
बंगाल को लेकर ममता बनर्जी का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भाजपा परिसीमन की कवायद का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल को तीन हिस्सों में बांटने के लिए करना चाहती है, वह भी तब जब राज्य में पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की तैयारियां चल रही हैं। उनके इस आरोप का मतलब यह है कि परिसीमन के जरिए राज्य को बांटने से वे वोट बंट सकते हैं जो फिलहाल उनकी पार्टी के पक्ष में माने जाते हैं, और नई सीमाओं के चलते ये वोट अलग अलग सीटों में बिखर सकते हैं।
चुनावों से पहले विपक्ष की बड़ी चिंता
ममता बनर्जी का यह आरोप विपक्षी दलों की उस बड़ी चिंता को दिखाता है कि परिसीमन विधेयक का इस्तेमाल सिर्फ सीटों की सीमाएं अपडेट करने के बजाय चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 पहले से ही एक बड़ा राजनीतिक मुकाबला बना हुआ है, ऐसे में परिसीमन की कवायद के समय को लेकर विपक्ष यह मांग कर रहा है कि नई सीमाएं किस तरह खींची जा रही हैं और इससे केंद्र की सत्ताधारी पार्टी और राज्य स्तर के विपक्ष के बीच मुकाबला किस तरह बदल सकता है, इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए।


















