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आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों पर चले राजद्रोह का मुकदमा, रामदास आठवले की दो टूकराजनीति
24 अग॰ 2026, 6:49 am (64 दिन पहले)· 3

आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों पर चले राजद्रोह का मुकदमा, रामदास आठवले की दो टूक

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ ऐसी मांग उठाने वालों के विरुद्ध राजद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश में जो लोग भी आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने या इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं, उनके खिलाफ राजद्रोह का कड़ा मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आरक्षण कोई मामूली सुविधा नहीं बल्कि देश के संविधान द्वारा प्रदत्त एक मौलिक अधिकार है।

आरक्षण का विरोध सीधे तौर पर संविधान पर हमला

रामदास आठवले ने स्पष्ट किया कि जो ताकतें आरक्षण प्रणाली का विरोध कर रही हैं, वे असल में देश के संविधान का ही विरोध कर रही हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की मानसिकता रखने वाले लोग संविधान विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुए आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे अभियानों ने इस संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर से राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

अपने आधिकारिक बयान में केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि तमाम विरोधों और मांगों के बावजूद देश से आरक्षण को कभी भी समाप्त नहीं किया जा सकता है। सरकार और कानून दोनों ही नागरिकों के इन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने छात्र संगठनों और आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रमित करने वाली अफवाहों या विभाजनकारी बहकावे में न आएं।

सवाल-जवाब

रामदास आठवले ने क्या मांग की है?
रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वालों और इसे खत्म करने की मांग उठाने वालों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है।
रामदास आठवले किस पार्टी के प्रमुख हैं?
वे 'रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले)' के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री हैं।
आरक्षण को लेकर हाल ही में चर्चा क्यों तेज हुई है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने के अभियानों के कारण यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है।
क्या आरक्षण को समाप्त किया जा सकता है?
रामदास आठवले के अनुसार आरक्षण को समाप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि यह संविधान प्रदत्त अधिकार है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Ravikash Gupta@ravikash·63 दिन पहले

रामदास आठवले की यह मांग ऐसे समय में आई है जब वित्तीय बाज़ारों में सामाजिक समावेशन और कॉरपोरेट जगत में डायवर्सिटी इंडेक्स को लेकर वैश्विक निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। इस तरह के राजनीतिक बयानों से देश की घरेलू नीतिगत स्थिरता और कारोबारी माहौल पर असर पड़ सकता है, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में दीर्घकालिक निवेश करते वक्त नीतिगत स्पष्टता और सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। यदि इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर टकराव बढ़ता है, तो यह निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

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